समान विचार वाले दलों के साथ ‘सम्मानजनक गठबंधन’ के लिए बातचीत को तैयार : कर्रा
हक हक मनीषा
- 19 Aug 2024, 01:46 PM
- Updated: 01:46 PM
(आसिम कमाल)
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में ‘‘सम्मानजनक गठबंधन’’ करने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ बातचीत करने को तैयार है, लेकिन इस बार गठबंधन के मानदंड लोकसभा चुनाव से अलग होंगे।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में यह भी कहा कि गुलाम नबी आज़ाद की ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी’ (डीपीएपी) को लोगों द्वारा ‘‘पूरी तरह से खारिज’’ कर दिया गया और जनता ने कांग्रेस छोड़ने के लिए दंडित किया है।
पूर्व सांसद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का ‘‘पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना" कांग्रेस के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र पर एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के लिए "असंवैधानिक" कदम उठाने का आरोप लगाया।
गत शुक्रवार को कर्रा को जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने वकार रसूल वानी का स्थान लिया है।
जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीट पर तीन चरण... 18 सितंबर, 25 सितंबर और एक अक्टूबर को चुनाव कराए जाएंगे। चार जून को मतगणना होगी। साल 2019 में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।
कर्रा का कहना है कि भाजपा के ‘‘आधिपत्यवादी रवैये’’ का विरोध करने वाले सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से एकजुट होने का आह्वान पहले ही किया जा चुका है।
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसे दलों के साथ गठबंधन करेगी, कर्रा ने कहा, ‘‘पिछले गठबंधन (लोकसभा चुनाव के लिए) के अलग-अलग मानदंड थे, यह राष्ट्रीय स्तर पर था। लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए मानदंड हमेशा अलग होते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, हमें सोचना होगा, जम्मू-कश्मीर में अपने नेतृत्व से भी बात करनी होगी। हमें यहां दिल्ली में नेतृत्व द्वारा आश्वासन दिया गया है कि एक सम्मानजनक गठबंधन होगा क्योंकि उस समय (लोकसभा चुनाव) तय किए गए मानदंड अलग थे जो मुझे नहीं लगता कि इस बार लागू होंगे।’’
कर्रा के अनुसार, ‘‘हमें कार्यभार संभालने के तुरंत बाद चर्चा शुरू करनी होगी, मुझे अपने सहयोगियों के साथ चर्चा करनी होगी और उसके बाद ही हम निर्णय लेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम समान विचारधारा वाले दलों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं जो भाजपा के आधिपत्यवादी रवैये के खिलाफ लड़ रहे हैं। हम इसके लिए तैयार हैं। हमें एक सम्मानजनक गठबंधन करना होगा लेकिन इस बार मानदंड अलग होंगे।’’
लोकसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने गठबंधन किया था। हालांकि, महबूबा मुफ्ती की पीडीपी गठबंधन का हिस्सा नहीं थी और उन्होंने नेकां पर ‘गुपकार’ गठबंधन की भावना का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।
श्रीनगर के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले 69 वर्षीय कर्रा 2017 में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
कर्रा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के कड़े आलोचक थे।
उन्होंने 2014 में श्रीनगर से लोकसभा चुनाव जीता था और इस तरह से नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला की चार दशकों में पहली चुनावी हार हुई थी।
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर कर्रा ने कहा कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लोगों का समर्थन मिला।
उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन करेगी।
कर्रा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर कांग्रेस का राजनीतिक रुख बहुत स्पष्ट है और वह लोकतंत्र की पूर्ण बहाली चाहती है।
उन्होंने कहा, ‘‘पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना होगा... उन कानूनों पर भी गौर करना होगा जो हम पर थोपे गए हैं।’’
कर्रा ने भाजपा पर जम्मू-कश्मीर के प्रति सौतेला रवैया रखने का आरोप लगाया और दावा किया लगाया कि उसने हमेशा देश भर में वोट हासिल करने के लिए इस केंद्र शासित प्रदेश का इस्तेमाल किया है।
कांग्रेस के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद की पार्टी के बारे में पूछे जाने पर कर्रा ने कहा, ‘‘लोगों ने उस पार्टी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। कांग्रेस छोड़ने के विचार को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है और उन्हें इसके लिए दंडित किया गया है।’’
भाषा हक हक