एम्स के एक निकाय ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए पाठ्येतर सुविधाओं में सुधार पर जोर दिया
मनीषा संतोष
- 19 Aug 2024, 12:43 PM
- Updated: 12:43 PM
नई दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली स्थित अखिल भारतीय चिकित्सा आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फैकल्टी एसोसिएशन (एफएआईएमएस) ने संस्थान के निदेशक से छात्र कल्याण केंद्र को उन्नत करने और छात्रों तथा निवासियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए परिसर में पाठ्येतर सुविधाओं में सुधार करने का आग्रह किया।
‘एसोसिएशन’ का यह अनुरोध राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) कार्य बल द्वारा किए गए एक ऑनलाइन सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें पाया गया कि मेडिकल के लगभग 28 प्रतिशत स्नातक छात्र और 15.3 प्रतिशत स्नातकोत्तर छात्र मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित हैं।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में 16.2 प्रतिशत एमबीबीएस छात्रों ने खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या के बारे मे सोचा, जबकि एमडी/एमएस छात्रों में यह संख्या 31 प्रतिशत दर्ज की गई।
दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक को लिखे पत्र में एफएआईएमएस ने यह भी प्रस्ताव दिया कि छात्रों, निवासियों और कर्मचारियों के बीच समुदाय और अपनेपन की भावना को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए एम्स परिसर के लिए पाठ्येतर सुविधाओं और कार्यक्रमों का मूल्यांकन करने और उसके बाद के विकास के लिए एक कार्य बल का गठन किया जाए।
एफएआईएमएस ने कहा, ‘‘चूंकि छात्रों, निवासियों और वैज्ञानिकों के बीच मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए हमें अकादमिक और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ-साथ उनकी भलाई को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।’’
हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि चार में से एक एमबीबीएस छात्र किसी न किसी तरह की चिंता, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से पीड़ित है।
एसोसिएशन ने कहा कि यह चिंताजनक आंकड़ा संस्थान के भीतर बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, संसाधनों और सहायता प्रणालियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करता है।
एफएआईएमएस ने पत्र में यह भी कहा कि जैसे-जैसे हमारा संस्थान छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की संख्या के लिहाज से बढ़ रहा है, यह तेजी से स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा पाठ्येतर सुविधाओं का इस विस्तार के साथ तालमेल नहीं है।
एफएआईएमएस ने कहा ‘‘पाठ्येतर गतिविधियां एक संतुलित कार्य-जीवन वातावरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो परिसर में सभी के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आवश्यक हैं।’’
बहरहाल, सुविधाओं की वर्तमान स्थिति ने शैक्षणिक और पेशेवर जिम्मेदारियों से परे जुड़ाव के अवसरों को सीमित कर दिया है।
एफएआईएमएस ने कहा ‘‘इससे निपटने के लिए, हम पाठ्येतर सुविधाओं और कार्यक्रमों के मूल्यांकन और इसके बाद इनके विकास के लिए समर्पित एक कार्य बल के गठन का प्रस्ताव करते हैं।’’
एफएआईएमएस ने कहा कि यह कार्य बल उन क्षेत्रों की पहचान करेगा जो पिछड़ रहे हैं और प्रणालीगत सुधारों का सुझाव देगा। इसमें छात्रों के शौक, गतिविधि क्लबों के लिए नए स्थानों और सुविधाओं का विकास आदि शामिल हो सकता है, जो ऐतिहासिक रूप से एम्स परिसर संस्कृति का जीवंत हिस्सा रहे हैं।
एफएआईएमएस ने कहा, ‘‘इन सुविधाओं और कार्यक्रमों का विकास तथा विस्तार न केवल समग्र परिसर के अनुभव को बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों, रेजीडेंट चिकित्सकों और कर्मचारियों के बीच समुदाय और अपनेपन की भावना को भी बढ़ावा देगा। यह जरूरी है कि हम ऐसा माहौल बनाने के लिए सक्रिय कदम उठाएं जो हमारे समुदाय के सदस्यों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास दोनों का समर्थन करे।’’
पत्र में एफएआईएमएस ने कहा ‘‘ हम विनम्र अनुरोध करते हैं कि छात्र कल्याण केंद्र (एसडब्ल्यूसी) के उन्नयन और पाठ्येतर सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में लिया जाए। एक जीवंत परिसर संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ हमारे छात्रों और सहकर्मियों का मानसिक कल्याण सुनिश्चित करना उनके समग्र विकास के साथ रोगियों की देखभाल, अनुसंधान और शिक्षण में दिल्ली स्थित एम्स की उत्कृष्टता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।’’
भाषा मनीषा