मोदी ‘एमपॉक्स’ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं: प्रधानमंत्री के प्रधान सलाहकार मिश्रा
ब्रजेन्द्र नेत्रपाल
- 18 Aug 2024, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से ‘मंकी पॉक्स’ (एमपॉक्स) को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति घोषित किए जाने के बाद रविवार को भारत में इसके मद्देनजर तैयारी की स्थिति और संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सलाहकार पी के मिश्रा ने कहा कि देश में एमपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है और वर्तमान मूल्यांकन के अनुसार इसका व्यापक स्तर पर फैलने का जोखिम कम है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एमपॉक्स की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मध्य और पूर्वी अफ्रीका में संक्रामक एमपॉक्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं, अफ़्रीका से बाहर एमपॉक्स का पहला मामला दर्ज किया गया है। इसके मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दिया है।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की सलाह के अनुसार मिश्रा ने देश में एमपॉक्स की तैयारी की स्थिति और संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अपूर्व चंद्रा, स्वास्थ्य अनुसंधान सचिव डॉ. राजीव बहल, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव कृष्णा एस वत्स, सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू और गृह सचिव गोविंद मोहन सहित अन्य मंत्रालयों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव को बताया गया कि एमपॉक्स संक्रमण आमतौर पर 2-4 सप्ताह तक प्रभावी रहता है और एमपॉक्स के रोगी आमतौर पर सहायक चिकित्सा देखभाल एवं प्रबंधन के साथ ठीक हो जाते हैं।
स्वास्थ्य सचिव चंद्रा ने बैठक में बताया कि भारत में इसके खतरे का आकलन करने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा 12 अगस्त को विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई गई थी और बचाव के लिए सभी उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर स्वास्थ्य दलों की ओर से निगरानी की जा रही है और राज्यों को भी इस संदर्भ में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
बयान के अनुसार, मिश्रा ने निर्देश दिया कि निगरानी बढ़ाई जाए और मामलों का तेजी से पता लगाने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएं।
उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षण प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को शीघ्र निदान के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
वर्तमान में 32 प्रयोगशालाएं परीक्षण के लिए तैयार हैं।
मिश्रा ने निर्देश दिए कि बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए प्रोटोकॉल को बड़े पैमाने पर प्रसारित किया जा सकता है।
उन्होंने बीमारी के संकेतों और लक्षणों के बारे में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाने और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भाषा ब्रजेन्द्र