डॉक्टर की हत्या: दुर्गा पूजा आयोजक ने समितियों से सरकार की सहायता अस्वीकार करने का आह्वान किया
आशीष माधव
- 17 Aug 2024, 09:55 PM
- Updated: 09:55 PM
कोलकाता, 17 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और ‘संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा समिति’ के मुख्य आयोजक सजल घोष ने पश्चिम बंगाल की सभी दुर्गा पूजा समितियों से ‘‘महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता’’ के विरोध में राज्य सरकार की 85,000 रुपये की सहायता राशि लेने से मना करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कोलकाता में एक महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के खिलाफ प्रदर्शन के बीच यह आह्वान किया है। घोष कई वर्षों से उत्तर कोलकाता में विभिन्न विषयों पर आधारित पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं और लाखों की संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं।
घोष ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और घरों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, बलात्कार और उनकी हत्या की जा रही है, जबकि ममता बनर्जी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। जब जनता का गुस्सा बढ़ रहा है, तो वह खुद को छोड़कर हर किसी को दोषी ठहरा रही हैं।’’
भाजपा पार्षद घोष ने कहा, ‘‘महिला चिकित्सक से अस्पताल में ड्यूटी के दौरान निर्ममतापूर्वक बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई, लेकिन अब तक केवल एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। यह एक विरोधाभास होगा यदि मौजूदा परिस्थितियों में पूजा समितियां इस सरकार से 85,000 रुपये की सहायता स्वीकार करती हैं, जिसने इस मुद्दे के प्रति कोई चिंता नहीं दिखाई है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पूजा समिति पीड़िता को श्रद्धांजलि देगी, घोष ने कहा, ‘‘हम इस पर विचार कर रहे हैं... हालांकि, हमने पूजा आयोजित करने की अपनी मूल योजना में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया है, क्योंकि लोग इन चार दिनों में सारा अवसाद, दुख, तनाव और दर्द भूलना चाहते हैं।’’
घोष ने कहा कि उनकी पूजा समिति ने पहले भी राज्य की सहायता को स्वीकार नहीं किया, केवल पहले वर्ष को छोड़कर जब पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा के लिए प्रत्येक समिति को 10,000 रुपये दिए थे। उन्होंने दावा किया, ‘‘तब से हमने राज्य से किसी भी तरह की वित्तीय मदद लेने से इनकार कर दिया है।’’
घोष का विरोध करते हुए, ‘त्रिधारा सम्मिलनी’ के मुख्य आयोजक और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक देबाशीष कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सजल घोष को सभी दुर्गा पूजा समितियों के बीच इस मुद्दे पर मतदान कराने के लिए पहल करनी चाहिए कि वे सहायता स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि वह इस मामले पर पूजा समितियों की राय के बारे में इतने आश्वस्त हैं तो उन्हें पूजा समितियों से जवाब मांगना चाहिए। यदि वह ऐसी कोई पहल नहीं करते हैं, बल्कि झूठ फैलाते हैं, तो हम मान लेंगे कि वह दुर्गा पूजा जैसे त्योहार पर राजनीति कर रहे हैं।’’
वहीं, शिवमंदिर पूजा समिति के अध्यक्ष और ‘फोरम फॉर दुर्गोत्सव’ के संस्थापक सदस्य पार्थ घोष ने कहा कि मानदेय स्वीकार करने या न करने का निर्णय प्रत्येक पूजा समिति पर छोड़ देना चाहिए।
भाषा आशीष