दिल्ली में चिकित्सकों का निर्माण भवन पर धरना, कोलकाता की प्रशिक्षु चिकित्सक के लिए न्याय की मांग की
शुभम सुरेश
- 16 Aug 2024, 09:34 PM
- Updated: 09:34 PM
नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में निर्माण भवन के बाहर शुक्रवार को प्रमुख अस्पतालों के हजारों चिकित्सकों ने धरना दिया और "हमें न्याय चाहिए" जैसे नारे लगाए।
धरना दे रहे चिकित्सक अपनी सुरक्षा और कोलकाता में बलात्कार के बाद निर्मम हत्या की शिकार हुई प्रशिक्षु डॉक्टर के लिए न्याय की मांग कर रहे थे।
बड़ी संख्या में चिकित्सकों के विरोध प्रदर्शन के कारण मौलाना आजाद रोड को बंद कर दिया गया। कुछ चिकित्सक अपने हाथ पर काली पट्टियां पहने हुए थे।
इस दौरान सैकड़ों लोग पोस्टर पकड़े हुए थे। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की एक महिला चिकित्सक मानसी ने एक पोस्टर पकड़ा हुआ था, जिस पर लिखा था, "हम सुरक्षित रहने के लिए कहां जा सकते हैं?"
मानसी ने कहा, "जब उसके (मृतका) साथ बलात्कार हुआ और उसकी हत्या की गई तब वह अपने कार्यस्थल पर थी। हम सड़क पर सुरक्षित नहीं हैं और कुछ लोग तो अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं।"
दोपहर में प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और सड़क को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया जिससे यातायात की दिशा बदलनी पड़ी।
निर्माण भवन लुटियंस दिल्ली में संसद के पास स्थित है और यहां अन्य विभागों के अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय का भी दफ्तर है।
रेजिडेंट डॉक्टर निर्माण भवन के बाहर सड़क किनारे खड़े थे और भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जिन्होंने सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर रखी थी।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चिकित्सकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रही। इस दौरान अस्पतालों में सभी वैकल्पिक सेवाएं निलंबित रहीं।
चिकित्सकों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण भवन के बाहर सड़क के किनारे प्रदर्शन किया। अपने हाथों में पोस्टर और बैनर लिये हुए चिकित्सकों ने नारे लगाते हुए अपनी सुरक्षा के प्रति गुस्सा और चिंता व्यक्त की। पुलिस ने प्रदर्शन के मद्देनजर सड़क के दोनों ओर बैरिकेड लगाये थे।
रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. राहुल ने कहा, "इस भयावह घटना को एक सप्ताह बीत चुका है। हम पांच दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह अकल्पनीय है कि जीवन बचाने वाले एक चिकित्सक के साथ निर्ममता से बलात्कार कर हत्या कर दी गई। न्याय और सुरक्षा उपायों के लिए हमारी मांगें अनुचित नहीं हैं। वे आवश्यक हैं।"
बड़ी संख्या में चिकित्सकों के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण कई मार्ग बाधित हुए।
इस बीच प्रतिनिधिमंडल के छह सदस्य सरकारी अधिकारियों से मिलने के लिए निर्माण भवन के अंदर चले गए, जबकि चिकित्सक विरोध में सड़क पर बैठे हैं।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभिन्न रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के प्रतिनिधियों की एक व्यापक संयुक्त बैठक के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। बैठक में एम्स, राममनोहर लोहिया अस्पताल, डीडीयू अस्पताल आदि की आरडीए ने शिरकत की थी।
भाषा शुभम