अस्पतालों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करें, कोलकाता के पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दें: आईएमए प्रमुख
नेत्रपाल राजकुमार
- 16 Aug 2024, 08:14 PM
- Updated: 08:14 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रमुख डॉ आर वी अशोकन ने शुक्रवार को कहा कि देश भर के सभी अस्पतालों को हवाई अड्डों की तरह सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए ताकि डॉक्टर बिना किसी डर के काम कर सकें।
यह आईएमए की पांच मांगों में से एक है, जिसने कोलकाता के आर जी कर सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर के साथ कथित बलात्कार और उसकी हत्या तथा वहां तोड़फोड़ के विरोध में देश भर में गैर-आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं (शनिवार सुबह छह बजे से रविवार सुबह छह बजे तक) को 24 घंटे के लिए बंद करने की घोषणा की है।
अशोकन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हवाई अड्डे त्रिस्तरीय सुरक्षा के साथ सुरक्षित क्षेत्र हैं, इसलिए कम से कम प्रमुख अस्पतालों में एक सुरक्षा प्रोटोकॉल होना चाहिए और उन्हें सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि इससे वे अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए पात्र होंगे।’’
उन्होंने कहा कि दूसरा, स्वास्थ्यकर्मियों पर हिंसा को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून भी होना चाहिए।
अशोकन ने कहा कि 25 राज्यों में डॉक्टरों और अस्पतालों पर हमलों के खिलाफ कानून हैं लेकिन अब तक कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि जमीनी रूप से ये कानून अधिकांशत: अप्रभावी हैं और प्रतिरोधक (कानून के डर)के उद्देश्य को पूरा नहीं करते हैं।
अशोकन ने कहा, ‘‘हम सरकार से महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधनों को शामिल करते हुए स्वास्थ्य देखभाल सेवा कार्मिक और नैदानिक प्रतिष्ठान (हिंसा और संपत्ति को नुकसान का निषेध) विधेयक, 2019 के मसौदे को पेश करने पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं जैसे कि महामारी रोग (संशोधन) अधिनियम, 2020 को संसद द्वारा अनुमोदित और पारित किया गया।’’
आईएमए ने यह भी मांग की है कि कोलकाता की घटना के पीड़ित परिवार को उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाना चाहिए।
अशोकन ने कहा, ‘‘हमारी मांगों में से एक यह है कि पीड़ित परिवार को अपराध की प्रकृति को देखते हुए उचित और सम्मानजनक मुआवजा प्रदान किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि आईएमए उचित जांच और समयबद्ध अभियोजन के साथ-साथ दोषियों के लिए उचित सजा की भी मांग करती है।
अशोकन ने कहा कि चिकित्सकों के संगठन की पांचवीं और अंतिम मांग रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटों और कामकाजी परिस्थितियों के संबंध में है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह रेजिडेंट डॉक्टर (कोलकाता की घटना में जान गंवाने वाली) लगातार 36 घंटे से ड्यूटी पर थी। क्या यह सही है? आप कितने घंटे डॉक्टर को ड्यूटी पर रखना चाहते हैं? मानव के लिए आठ घंटे या 12 घंटे तक ड्यूटी पर रहना संभव होगा, लेकिन 36 घंटे तक एक डॉक्टर को ड्यूटी पर रखना क्या उचित है? ऐसे में गलतियां होना स्वाभाविक है, यह न तो मरीजों के लिए अच्छा है और न ही डॉक्टरों के लिए।’’
भाषा नेत्रपाल