पाकिस्तान में एमपॉक्स के तीन मामले सामने आए
प्रशांत पवनेश
- 16 Aug 2024, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
पेशावर, 16 अगस्त (एपी) पाकिस्तान में अब तक एमपॉक्स वायरस के कम से कम तीन मरीज पाए गए हैं। शुक्रवार को यह बात सामने आई। सरकार ने इस बीच हवाई अड्डों पर जांच प्रणाली को मजबूत करने का फैसला किया है।
पाकिस्तान में एमपॉक्स के मिले मामले एशिया में इस रोग की दस्तक है और यह अधिक आसानी से फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा एमपॉक्स के प्रसार को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है।
तीनों मरीज उत्तर-पश्चिम में स्थित खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के हैं, जो अफगानिस्तान की सीमा से लगा उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है।
खैबर पख्तूनख्वा के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक सलीम खान ने कहा कि दो मरीजों का पता संयुक्त अरब अमीरात से आने पर चला, जबकि तीसरे मरीज के नमूने पुष्टि के लिए इस्लामाबाद स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान भेजे गए हैं।
संघीय स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, जिस आखिरी मरीज में यह वायरस पाया गया था, वह खैबर पख्तूनख्वा के मर्दान जिले का है।
यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि उक्त मरीज एमपॉक्स के किस स्वरूप से पीड़ित है और क्या यह वही स्वरूप है जिसकी पुष्टि सबसे पहले अफ्रीका के बाहर स्वीडन में हुई थी।
प्रवक्ता ने कहा, “प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना शुरू कर दिया गया है और अधिक लोगों के नमूने प्राप्त किए जा रहे हैं।”
अधिकारियों ने बताया कि तीनों मरीजों को पृथकवास में रखा जा रहा है तथा उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सीमा चौकियों और हवाई अड्डों पर अधिकारियों को सख्त निगरानी सुनिश्चित करने और विदेश से लौटने वाले किसी भी यात्री में बीमारी के लक्षण दिखने पर चिकित्सा परीक्षण के लिए नमूने एकत्र करने का निर्देश दिया गया है।
प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य समन्वयक डॉ. मुख्तार अहमद भारत ने कहा कि संघीय अस्पतालों को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं और स्वास्थ्य मंत्रालय तथा सीमा स्वास्थ्य सेवाएं “किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क हैं”।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एमपॉक्स के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा घोषित किया है।
अत्यधिक संक्रामक रोग, जिसे पहले ‘मंकीपॉक्स’ के नाम से जाना जाता था, ने कांगो गणराज्य में कम से कम 450 लोगों की जान ले ली। यह मंकीपॉक्स वायरस के कारण होता है, जो कि चेचक के समान ही विषाणुओं के समूह से संबंधित है, लेकिन कम हानिकारक है।
यह वायरस मूल रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता था, लेकिन अब यह मनुष्यों से मनुष्यों में भी फैल रहा है।
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