यूसीसी मुद्दे पर राजग के सहयोगी दल एकमत नहीं, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर है सहमति
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र अविनाश
- 16 Aug 2024, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के जिस मुद्दे का पुरजोर समर्थन किया उस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अधिकतर सहयोगी दलों ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भाजपा की सबसे बड़ी सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने कहा है कि वह अपने रुख को अंतिम रूप देने से पहले इसका मसौदा सामने आने का इंतजार करेगी जबकि उसकी दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी जनता दल (यूनाईटेड) ने कहा कि पार्टी ऐसे किसी भी सुधार का समर्थन करती है।
हालांकि पार्टी प्रवक्ता के सी त्यागी ने कहा कि धार्मिक समूहों और राज्यों सहित सभी हितधारकों से बात करके आम सहमति बनाने के बाद ही इस पर जोर दिया जाना चाहिए।
तेदेपा संसदीय दल के प्रमुख लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि उनकी पार्टी यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करने से पहले समान नागरिक संहिता से जुड़े प्रस्ताव के मसौदे का इंतजार करेगी।
पार्टी की एक अन्य सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी इस बारे में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाल ही में देश भर में सांस्कृतिक, भाषाई और क्षेत्रीय विविधताओं को रेखांकित करते हुए आश्चर्य जताया था कि सभी को एक छतरी के नीचे कैसे लाया जा सकता है।
पिछले महीने उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी कोई रुख अपनाने से पहले समान नागरिक संहिता पर मसौदे का इंतजार करेगी।
त्यागी ने अपनी बात रखने के लिए जद (यू) अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 2017 में विधि आयोग को दी गई जानकारी का हवाला दिया।
कुमार ने कहा था, ‘‘विभिन्न धार्मिक समूहों, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की सहमति प्राप्त किए बिना समान नागरिक संहिता लागू करने का कोई भी प्रयास सामाजिक टकराव का कारण बन सकता है और धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी में विश्वास का क्षरण हो सकता है।’’
हालांकि, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव पर राजग के सहयोगी दल एकमत दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की पुरजोर वकालत की थी।
त्यागी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर भाजपा से पूरी तरह सहमत है। जद (यू) और लोजपा (रामविलास) दोनों ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के समक्ष ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा को अपना समर्थन दिया था।
भाजपा की एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी शिव सेना, जिसका नेतृत्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, समान नागरिक संहिता और एक साथ चुनाव कराने का समर्थन करती रही है।
स्वतंत्रता दिवस पर करीब 98 मिनट के अपने संबोधन के दौरान मोदी ने यूसीसी और इसके बारे में उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लेख किया तथा इस विषय पर देश में गंभीर चर्चा की जरूरत पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘देश का एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि जिस नागरिक संहिता को लेकर हम लोग जी रहे हैं, वह सचमुच में साम्प्रदायिक और भेदभाव करने वाली संहिता है। मैं चाहता हूं कि इस पर देश में गंभीर चर्चा हो और हर कोई अपने विचार लेकर आए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जो कानून धर्म के आधार पर देश को बांटते हैं, ऊंच-नीच का कारण बन जाते हैं... उन कानूनों का आधुनिक समाज में कोई स्थान नहीं हो सकता। अब देश की मांग है कि देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता हो।’’
बार-बार चुनाव से देश की प्रगति में गतिरोध पैदा होने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से किसी भी योजना की घोषणा को अक्सर चुनावी नफा-नुकसान से जोड़ दिया जाता है।
उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस बारे में देश में व्यापक चर्चा हुई है, सभी राजनीतिक दलों ने अपने विचार रखे हैं और इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट भी तैयार की है।
उन्होंने कहा, ‘‘वन नेशन, वन इलेक्शन के लिए देश को आगे आना होगा। मैं लाल किले से देश के राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, देश के संविधान को समझने वाले लोगों से आग्रह करता हूं कि भारत की प्रगति के लिए, भारत के संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के सपने को साकार करने के लिए आगे आएं।’’
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र