एसबीआई-पीएनबी में खाते बंद करने का कर्नाटक सरकार का फैसला ‘संदेहास्पद’ लगता है: भाजपा सांसद
संतोष नेत्रपाल
- 16 Aug 2024, 04:34 PM
- Updated: 04:34 PM
बेंगलुरु, 16 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य लहर सिंह सिरोया ने शुक्रवार को कहा कि राज्य के स्वामित्व वाले निगम में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जरिये 187 करोड़ रुपये के घोटाले के मद्देनजर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में अपने खाते बंद करने का कर्नाटक सरकार का निर्णय ‘‘मनमाना और संदेहास्पद’’ लगता है।
उन्होंने जानना चाहा कि दो राष्ट्रीयकृत बैंकों को क्यों निशाना बनाया गया जबकि सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों द्वारा शासित होते हैं।
सिरोया ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि सभी विभागों को इन दोनों बैंकों के खाते बंद करने और जमा राशि निकालने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि खबरों में यह भी कहा गया है कि इन बैंकों में आगे किसी तरह के जमा या निवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता को लेकर लिया गया है।
कर्नाटक सरकार ने 12 अगस्त को अपने सभी विभागों, बोर्ड, निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और विश्वविद्यालयों को एसबीआई तथा पीएनबी में जमा अपनी राशि समेत निवेश को वापस लेने और इन संस्थानों के साथ किसी भी तरह का लेन-देन बंद करने का आदेश दिया था। इस आदेश की खबर 14 अगस्त को मिली थी।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक सरकार का यह कदम मुझे मनमाना और संदेहास्पद लगता है, खासकर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम (केएमवीएसटीडीसी) घोटाला सामने आने के बाद, जिसमें एक राष्ट्रीयकृत बैंक के माध्यम से लगभग 187 करोड़ रुपये अवैध रूप से अंतरित किए गए थे।’’
कर्नाटक से भाजपा सांसद उस घोटाले का जिक्र कर रहे थे जिसमें कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी नागेंद्र को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और वह वर्तमान में जेल में हैं।
यह घोटाला केएमवीएसटीडीसी के लेखा अधीक्षक चन्द्रशेखरन पी. की आत्महत्या के बाद प्रकाश में आया। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने कहा था कि कैसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) में एक नया खाता बनाया गया जहां निगम का सारा पैसा अंतरित कर दिया गया और इसके बाद 88 करोड़ रुपये अवैध रूप से हैदराबाद के विभिन्न बैंक खातों में अंतरित किए गए।
सिरोया ने आश्चर्य जताया कि क्या एक राज्य सरकार दो राष्ट्रीयकृत बैंकों के खिलाफ ऐसा एकतरफा निर्णय ले सकती है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सभी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों और विनियमों द्वारा शासित होते हैं या नहीं।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘यदि राज्य सरकार को बैंकों से समस्या है, तो क्या उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक के पास नहीं जाना चाहिए था? क्या कुछ राष्ट्रीयकृत बैंक राज्य सरकार के लिए अधिक स्वीकार्य हो सकते हैं और कुछ कम? राज्य सरकार जिस वित्तीय अनियमितता की बात कर रही है वह किस प्रकृति की है? क्या उन्होंने इसकी जांच की है? वास्तव में कर्नाटक सरकार के भीतर क्या हो रहा है?’’
उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस आदेश पर संज्ञान लेने की अपील की।
भाषा संतोष