दिल्ली दंगा 2020 : पुलिस ने शरजील इमाम की जमानत अर्जी का विरोध किया
धीरज रंजन
- 19 Mar 2024, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के उत्तर पूर्वी हिस्से में 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगे के सिलसिले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम की जमानत अर्जी का मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया।
पुलिस ने इमाम के भाषणों को आधार बनाया जिसमें कथित तौर पर उसने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को संगठित किया और ‘चक्का जाम’ को विरोध के तरीके के तौर पर ‘प्रचारित’ किया जो ‘‘शांतिपूर्ण विरोध का कोई रास्ता नहीं’’था।
इमाम, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के संस्थापक खालिद सैफी और उमर खालिद सहित कई अन्य लोगों पर फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगे का कथित ‘मास्टरमाइंड’ होने पर आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी।
विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के समय हिंसा पैदा करने की साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इमाम ने अपने सार्वजनिक संबोधनों में कार्ययोजना के रूप में ‘चक्का जाम’ के विचार का प्रचार किया और कहा कि ‘‘टकराव वाली हिंसा तो होनी ही है।’’
प्रसाद ने कहा, ‘‘उसके भाषण पूरी तरह से लामबंदी के मकसद से थे। इनमें ‘अगर आप सड़कों पर नहीं आएंगे तो खत्म हो जाएंगे, आपके पास कुछ नहीं बचेगा’ जैसी भाषा से उकसाया जा रहा था। सभी भाषण एक जैसे हैं। सब कुछ चक्का जाम, बाबरी, तीन तलाक, सीएए और धारा 370 के बारे में है।’’उन्होंने कहा, ‘‘तो लामबंदी की गई, चक्का जाम किया गया, टकराव किया गया और फिर दंगे हुए।’’
प्रसाद ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि एक भाषण में इमाम ने ‘चिकन नेक’ गलियारे को अवरुद्ध करके पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से ‘काटने’ की भी बात कही थी।
इससे पहले इमाम का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल के कथित भड़काऊ भाषणों में किसी भी तरह की हिंसा का आह्वान नहीं किया गया था क्योंकि व्यवधान डालने का उनका तरीका ‘पूरी तरह से गांधीवादी’ था।
अधीनस्थ अदालत ने 11 अप्रैल, 2022 को 25 अगस्त, 2020 को दर्ज मामले में गिरफ्तार इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। वह हिंसा से जुड़े कई मामलों में जनवरी 2020 से ही जेल में है।
इमाम की जमानत अर्जी पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
भाषा धीरज