भारत, ऑस्ट्रेलिया ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की
धीरज दिलीप
- 13 Aug 2024, 09:02 PM
- Updated: 09:02 PM
नयी दिल्ली, 13 अगस्त (भाषा)भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद के लिए ‘‘छद्म आतंकवादी’’के इस्तेमाल की भी निंदा की।
आतंकवाद से निपटने के लिये गठित भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त कार्य समूह की सोमवार को नयी दिल्ली में हुई 14वीं बैठक में आतंकवाद से निपटने में द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर प्रमुखता से चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय ने बताया, ‘‘भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आतंकवाद के सभी स्वरूप की कड़ी निंदा की तथा व्यापक और सतत तरीके से आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद के लिए आतंकवादियों के छद्म उपयोग की भी निंदा की।’’दोनों पक्षों ने घरेलू, क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद के खतरे के आकलन पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
यहां जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने आतंकवादियों द्वारा नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए इंटरनेट के दुरुपयोग, कट्टरपंथ और आतंकवाद के वित्तपोषण, संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच गठजोड़ सहित अन्य मुद्दों से संबंधित आतंकवाद विरोधी चुनौतियों पर चर्चा की।’’
बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ (वित्तीय कार्रवाई कार्य बल), क्वाड और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) जैसे क्षेत्रीय, वैश्विक और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्रालय में आतंकवाद-रोधी मामलों के संयुक्त सचिव के.डी. देवल और ऑस्ट्रेलिया के विदेश एवं व्यापार विभाग में आतंकवाद रोधी मामलों के दूत रिचर्ड फीकेस ने बैठक में अपने-अपने देशों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने इसके अलावा अलग से समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।
दोनों पक्षों ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित छठी भारत-ऑस्ट्रेलिया समुद्री सुरक्षा वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों ने समावेशी विकास और वैश्विक कल्याण के लिए अनुकूल सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, ‘‘ दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा वातावरण, समुद्री मामलों के प्रति जागरूकता, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) समन्वय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय जुड़ाव और समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग सहित आपसी हित के विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।’’
भाषा धीरज