कोलकाता में डॉक्टर के दुष्कर्म-हत्या का मामला:दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अनिश्चितकालीन हड़ताल
गोला मनीषा
- 12 Aug 2024, 05:30 PM
- Updated: 05:30 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) दिल्ली में केंद्र द्वारा संचालित एम्स, आरएमएल अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल समेत कई अस्पतालों के रेजीडेंट चिकित्सकों ने कोलकाता में एक महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म एवं हत्या के मामले को लेकर सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोरडा) के अनुसार, अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान सभी बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी), ऑपरेशन थिएटर और वार्ड ड्यूटी बंद रहेंगी लेकिन आपातकालीन सेवाएं सामान्य दिनों की तरह चालू रहेंगी ताकि यह सुनिश्चित हो कि आपात चिकित्सा वाले रोगियों को परेशानी न हो।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) भी कोलकाता में प्रशिक्षु रेजीडेंट चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले के विरोध में फोरडा की देशव्यापी हड़ताल में शामिल हो गयी है।
एम्स, आरडीए के महासचिव डॉ. रघुनंदन दीक्षित ने कहा, ‘‘हम यह भी चाहते हैं कि पीड़िता के परिवार को उचित मुआवजा भी दिया जाए। इस जघन्य अपराध को उस स्थान पर अंजाम दिया गया, जिसका उद्देश्य लोगों की जान बचाना है। यह उन लोगों के सामने आने वाले गंभीर खतरे को लेकर आगाह करता है जो निस्वार्थ भाव से हमारे समाज की सेवा करते हैं।’’
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास), डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मेडिकल कॉलेज तथा राष्ट्रीय क्षय एवं श्वसन रोग संस्थान के चिकित्सक सुबह नौ बजे शुरू हुई इस हड़ताल में शामिल हैं।
फोरडा के महासचिव डॉ. सर्वेश पांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमने स्वास्थ्य सचिव के सामने अपनी मांगें रखीं, जिनमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को तत्काल हटाना, सीबीआई से जांच कराना, त्वरित अदालत में मामले की सुनवाई और केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम को लागू करने के लिए एक समिति का गठन शामिल है।’’
‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशंस जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क’ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉ. ध्रुव चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस बार देश भर के चिकित्सक तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता और हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।’’
चौहान ने कहा, ‘‘फोरडा ने देश भर में वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाओं को रोकने का निर्णय लिया है, जिसका सभी चिकित्सकों और चिकित्सा संघों ने समर्थन किया है। व्यक्तिगत तौर पर, हम चिकित्सकों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अपनी जान गंवाने वाली पीड़िता के समर्थन में एकजुटता दिखाने के लिए काला रिबन पहनें।’’
कई अस्पतालों में चिकित्सकों को पोस्टर लिए हुए देखा गया जिसमें लिखा गया है, ‘‘हम काम करने का सुरक्षित माहौल चाहते हैं।’’ उन्होंने ‘‘हमें न्याय चाहिए’’ के नारे भी लगाएं।
जीटीबी अस्पताल के आरडीए अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा, ‘‘यह राष्ट्रीय चिंता का विषय है और जब तक हमें ठोस परिणाम नहीं दिख जाते, हम पीछे नहीं हटेंगे। हम अपने साथी छात्रों के साथ खड़े रहेंगे और अपना पूरा समर्थन देंगे’’
शर्मा ने कहा कि कोलकाता की घटना जघन्य और कल्पना से परे है।
जीटीबी अस्पताल में हाल में एक व्यक्ति की हत्या के संदर्भ में भी उन्होंने अस्पताल में सुरक्षा चिंताओं का उल्लेख किया।
आरडीए सदस्यों ने स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा से भी मुलाकात की और उनसे घटना की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
फोरडा ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान एक परास्नातक प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले को लेकर यह कदम उठाया है।
पश्चिम बंगाल के इस सरकारी अस्पताल के सेमीनार हॉल में बृहस्पतिवार रात को 32 वर्षीय डॉक्टर का शव अर्द्ध नग्न हालत में मिला था।
फोरडा ने रविवार को जारी किए गए एक बयान में कहा, ‘‘आरजी कर में हमारे सहकर्मियों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए, हम 12 अगस्त से अस्पतालों में गैरजरूरी सेवाओं के देशव्यापी निलंबन की घोषणा करते हैं। यह निर्णय सोच-समझकर लिया गया है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हमारी आवाज सुनी जाए और न्याय एवं सुरक्षा की मांगों को बिना किसी देरी के स्वीकार किया जाए।’’
भाषा गोला