फेमा के तहत एनडीटीवी के ‘कंपाउंडिंग’ आवेदनों पर विचार करने के आदेश के खिलाफ ईडी की याचिका खारिज
पारुल सुरेश
- 12 Aug 2024, 03:07 PM
- Updated: 03:07 PM
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका सोमवार को खारिज कर दी, जिसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन से जुड़े एक मामले में एनडीटीवी की ओर से दाखिल ‘कंपाउंडिंग’ आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
‘कंपाउंडिंग’ का मतलब फेमा के तहत किसी नियम/विनियम/ अधिसूचना/आदेश/निर्देश/परिपत्र आदि के प्रावधानों के उल्लंघन को स्वैच्छिक रूप से स्वीकार करना और उसके निवारण के लिए अनुरोध करना है।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है।
बंबई उच्च न्यायालय ने 2018 के अपने आदेश में ईडी की ओर से ‘कंपाउंडिंग’ कार्यवाही पर उठाई गई आपत्तियों को खारिज कर दिया था।
ईडी ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुविधाओं का लाभ उठाने के दौरान विदेशी मुद्रा नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के लिए एनडीटीवी को नवंबर 2015 में ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था।
आरबीआई ने हालांकि, लगभग एक साल बाद एनडीटीवी से कहा था कि वह उसके ‘कंपाउंडिंग’ आवेदन पर विचार नहीं कर सकता, क्योंकि ईडी ने उसे एक दिसंबर 2017 को भेजे पत्र में एनडीटीवी और उसकी सहायक कंपनियों के धनशोधन में शामिल होने का संदेह जताया है और नये आरोप लगाए हैं।
इसके बाद, एनडीटीवी ने ईडी के पत्र सहित अन्य फैसलों के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया था। कंपनी ने उच्च न्यायालय से कहा था कि वह भले ही 2015 में जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ में ईडी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करती है, लेकिन उसने अपने शेयरधारकों एवं अन्य हितधारकों को और अधिक परेशानी से बचाने के लिए ‘कंपाउंडिंग’ कार्यवाही का विकल्प चुना है।
आरबीआई को फेमा के तहत उल्लंघनों की ‘कंपाउंडिंग’ करने का अधिकार है, लेकिन ईडी के वकील ने उच्च न्यायालय को बताया था कि फरवरी 2007 में केंद्र सरकार ने ‘कंपाउंडिंग’ नियमों में एक प्रावधान शामिल किया था।
इस प्रावधान में कहा गया है कि अगर ईडी को लगता है कि ‘कंपाउंडिंग’ कार्यवाही किसी ऐसे गंभीर उल्लंघन से संबंधित है, जिसमें धनशोधन, आतंकवादी वित्तपोषण या राष्ट्र की संप्रभुता एवं अखंडता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के शामिल होने का संदेह है, तो आरबीआई ऐसे मामलों की ‘कंपाउंडिंग’ नहीं करेगा।
ईडी के वकील ने कुछ दस्तावेज भी पेश किए थे, जिनमें ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा एनडीटीवी और उसकी कुछ सहायक कंपनियों के टूजी ‘घोटाले’ सहित कई पुराने मामलों में धनशोधन में शामिल होने का संदेह जताया गया था तथा नये आरोप लगाए गए थे।
एनडीटीवी के वकील ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उसने दलील दी थी कि आरबीआई को हासिल वैधानिक शक्तियों में “केवल संदेह के आधार पर” हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है।
भाषा पारुल