हिंडनबर्ग विवाद : वाम दलों ने जेपीसी से जांच कराने की मांग की
आशीष खारी
- 11 Aug 2024, 09:47 PM
- Updated: 09:47 PM
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) वाम दलों ने अमेरिका की शोध एवं निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधवी बुच के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन करने की रविवार को मांग की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने एक बयान में कहा कि पहले अदाणी समूह की कंपनियों द्वारा शेयर मूल्य में हेराफेरी को उजागर कर चुकी हिंडनबर्ग रिसर्च ने अब सेबी की अध्यक्ष माधवी बुच और उनके पति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी ने कहा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में दस्तावेजों का हवाला देते हुए दिखाया गया है कि बुच और उनके पति के पास उन्हीं ‘ऑफशोर फंड’ में हिस्सेदारी थी, जिनका इस्तेमाल विनोद अदाणी ने अदाणी कंपनियों में निवेश करने के लिए किया था।
माकपा ने कहा, ‘‘नियामक की प्रमुख के खिलाफ इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, यह जरूरी है कि उचित जांच होने तक वह अध्यक्ष पद से हट जाएं।’’
बयान में कहा गया, ‘‘माकपा का पोलित ब्यूरो अपनी मांग दोहराता है कि अदाणी समूह के शेयर में हेरफेर के पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित की जानी चाहिए।’’
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘हिंडनबर्ग मामले में नवीनतम खुलासे में नियामक सेबी पर आरोप लगाया गया है और यह भी कहा गया है कि इसकी अध्यक्ष भी हेरफेर में शामिल थीं। उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित की जानी चाहिए।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के महासचिव डी राजा ने कहा कि जेपीसी गठित हो या नहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस मुद्दे पर बोलना चाहिए।
राजा ने कहा, ‘‘हिंडनबर्ग के खुलासे ने मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की पूरी तरह से पोल खोल दी है। उजागर हो गया है कि किस तरह प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार देश की संपत्ति लूटने के लिए कॉरपोरेट घरानों, विशेषकर अदाणी को समर्थन दे रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सेबी बाजार नियामक है, लेकिन सेबी प्रमुख के हितों में टकराव है...यह एक बहुत गंभीर नैतिक सवाल है कि क्या वह प्रमुख बनी रह सकती हैं? उन्हें इस पर विचार करना होगा।’’
राजा ने कहा, ‘‘सेबी प्रमुख को पद छोड़ना होगा। उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है। कुछ लोगों ने पहले ही जेपीसी की मांग की है। जेपीसी गठित हो या नहीं हो, स्थिति को ऐसे ही जारी रहने नहीं दिया जा सकता। वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि वे इस स्थिति में क्या करने जा रहे हैं?’’
माकपा नेता हन्नान मोल्ला ने इसे ‘‘पुरानी कहानी’’ बताते हुए आरोप लगाया कि सेबी ने पहले के आरोपों की उचित जांच नहीं की।
उन्होंने कहा, ‘‘आप जानते हैं कि यह एक पुरानी कहानी है। जब पहली बार यह मामला उजागर हुआ था, तो पूरा देश इस बात से स्तब्ध था कि शेयर बाजार में हेरफेर से किस तरह मोदी के बहुत करीबी दोस्त अदाणी और उनके परिवार को मदद मिली और वे शेयर में हेरफेर करने में लगे हुए हैं। उस समय सरकार अदाणी परिवार का बचाव कर रही थी कि यह झूठ है, रिपोर्ट सही नहीं है।’’
मोल्ला ने कहा कि कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सेबी पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब यह उजागर हो गया है कि सेबी अध्यक्ष की इसमें कुछ मिलीभगत है...सेबी ने सेबी अध्यक्ष की मिलीभगत के कारण ही उचित तरीके से जांच नहीं की...अब सरकार या सेबी सच्चाई सामने नहीं ला सकते, यह बिल्कुल स्पष्ट है। मेरा मानना है कि केवल संयुक्त संसदीय समिति ही उचित तरीके से जांच कर सकती है।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने भी जेपीसी जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘हिंडनबर्ग रिपोर्ट अदाणी के शेयर हेराफेरी मामले में सेबी अध्यक्ष की संलिप्तता को दर्शाती है। सेबी से स्पष्ट रूप से अदाणी समूह के व्यापक धोखाधड़ी की जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। सेबी अध्यक्ष को हटाया जाना चाहिए और अदाणी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति को सौंपी जानी चाहिए।’’
इसी तरह, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा ने कहा कि यह भ्रष्टाचार के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह दर्शाता है कि हमारी वित्तीय प्रणालियों को कैसे अपने चंगुल में किया हुआ है। भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश की जा रही है। आप वित्तीय कुप्रबंधन के बारे में सेबी से शिकायत करते हैं और अब सेबी ही दागदार है।’’
उन्होंने जेपीसी जांच की मांग का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘हमारी प्रणालियों में हेराफेरी की गई है और बहुत बुरी तरह से हेराफेरी की गई है।’’
हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया है कि सेबी की अध्यक्ष बुच और उनके पति के पास कथित अदाणी धन हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए ‘ऑफशोर फंड’ में हिस्सेदारी थी।’
भाषा आशीष