धनखड़ ने बांग्लादेश की स्थिति की तुलना भारत से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई
आशीष नेत्रपाल
- 10 Aug 2024, 10:11 PM
- Updated: 10:11 PM
जोधपुर, 10 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के कुछ नेताओं के बांग्लादेश की स्थिति की तुलना भारत से करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कहा कि कुछ लोगों द्वारा फैलाया जा रहा यह विमर्श बेहद चिंताजनक है कि पड़ोसी देश में जो हुआ, वह हमारे देश में भी होगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय के प्लेटिनम जुबली समारोह में कानूनी बिरादरी को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा, ‘‘इस देश का एक नागरिक जो संसद सदस्य रह चुका है, और दूसरा जो विदेश सेवा में काफी कुछ देख चुका है, कैसे उन्होंने तुरंत यह बात कह दी कि पड़ोसी देश में जो हुआ, वह भारत में भी होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों द्वारा यह विमर्श गढ़ने का प्रयास बेहद चिंताजनक है कि हमारे पड़ोस में जो हुआ, वह भारत में भी होगा।’’
धनखड़ ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन वह परोक्ष रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं-सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर की हालिया टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे।
हाल में एक कार्यक्रम में खुर्शीद ने कहा था कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वैसा ही यहां भी हो सकता है, भले ही ‘‘ऊपर से सबकुछ सामान्य नजर आता है।’’
अय्यर ने बांग्लादेश की स्थिति की तुलना भारत से की थी।
धनखड़ ने यह भी कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतें ‘‘अपनी हरकतों को छिपाने या वैध बनाने के लिए हमारी संवैधानिक संस्थाओं के मंचों का इस्तेमाल कर रही हैं।’’
उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में राष्ट्रीय हित सर्वोच्च है। धनखड़ ने कहा, ‘‘यह सर्वोच्च प्राथमिकता है, एकमात्र प्राथमिकता है और हम किसी भी चीज से पहले राष्ट्र को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
राज्यसभा के सभापति ने यह भी कहा कि विधायिका निर्णय नहीं लिख सकती, इसी तरह न्यायपालिका कानून नहीं बना सकती या ऐसे निर्देश नहीं दे सकती जो कानून से परे हों। उन्होंने कहा, ‘‘संविधान में सभी संस्थाओं की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है...अगर एक संवैधानिक संस्था के क्षेत्र में दूसरे का अतिक्रमण हो तो यह खतरनाक होगा।’’
उन्होंने उपस्थित लोगों से सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये संस्थाएं (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) अपने क्षेत्रों में काम कर रही हैं या वे दूसरे क्षेत्रों में काम करने के लिए विस्तार मोड में हैं।
देश के तीनों संवैधानिक स्तंभों की मजबूती पर जोर देते हुए धनखड़ ने कहा, ‘‘ उनकी कमजोरी हमारे लोकतंत्र को कमजोर करेगी और हमारे विकास के रास्ते को पटरी से उतार देगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इन ताकतों द्वारा हमारी संस्थाओं का दुरुपयोग न केवल राष्ट्र-विरोधी विमर्श स्थापित करने, बल्कि हमारे लोकतंत्र को पटरी से उतारने के उद्देश्य से भी किया जा रहा है। इसलिए हमें राष्ट्र-प्रथम की भावना के साथ मिलकर काम करना चाहिए।’’
धनखड़ ने कहा, ‘‘हमारे लोकतंत्र के लिए नापाक मंसूबे वालों से संस्थाओं को बचाने के लिए काम करें और अगर वे कुछ पैठ बनाने में कामयाब भी हो जाते हैं, तो चुप न रहें, उन्हें बेअसर करें।’’
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, ‘‘भारत विरोधी ताकतें हमारी प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं और विभिन्न स्तरों पर काम कर रही हैं। ये ताकतें हमारी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही हैं, उन्हें कलंकित, कमजोर कर रही हैं।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आपातकाल के दौरान एक व्यक्ति द्वारा स्वतंत्रता को बंधक बना लिया गया। बिना किसी गलती के गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायिक मदद लेने से रोक दिया गया। शीर्ष अदालत ने नौ उच्च न्यायालयों के फैसले को पलट दिया, जिन्होंने पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘किसी राष्ट्र की न्यायिक प्रणाली और उसकी कार्यक्षमता उसकी लोकतांत्रिक जीवंतता को परिभाषित करती है। किसी भी सरकार के लिए एक स्वतंत्र न्याय प्रणाली आवश्यक है, क्योंकि यह जीवनरेखा है।’’
भाषा आशीष