महाधिवक्ता को येदियुरप्पा के खिलाफ मामले में रोक हटवाने के लिये निर्देश दिया गया : जी परमेश्वर
प्रशांत दिलीप
- 10 Aug 2024, 09:39 PM
- Updated: 09:39 PM
बेंगलुरु, 10 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को कहा कि महाधिवक्ता और विधिक टीम को भाजपा के वरिष्ठ नेता बी.एस. येदियुरप्पा के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के मामले में रोक हटवाने के लिए कहा गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसा होने के बाद मामले के संबंध में कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में परमेश्वर ने कहा, “हमने महाधिवक्ता और अपने वकीलों से स्थगन हटवाने के लिए कहा है। स्थगन हटते ही हम कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। वह (येदियुरप्पा) भविष्य में कानूनी रूप से मामला लड़ सकते हैं, हमें भी कानूनी रूप से लड़ना होगा।”
उच्च न्यायालय ने इससे पहले एक अंतरिम आदेश जारी कर मामले की जांच कर रहे आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को येदियुरप्पा को गिरफ्तार करने से रोक दिया था।
यह मामला इस साल 14 मार्च को 17 वर्षीय एक लड़की की मां की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि येदियुरप्पा ने दो फरवरी को यहां डॉलर्स कॉलोनी स्थित उनके आवास पर एक मुलाकात के दौरान उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया था।
सीआईडी ने 27 जून को फास्ट ट्रैक कोर्ट में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मैसूरु में कहा कि वह येदियुरप्पा समेत विपक्षी नेताओं को बेनकाब करेंगे और उन घोटालों को उजागर करेंगे जिनमें वे शामिल थे। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा कार्यकाल के दौरान हुए कथित घोटालों के बारे में पूछे गए सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि जांच के आदेश दे दिए गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
गृह मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार यह देखने के लिए इंतजार कर रही है कि मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन घोटाले के संबंध में राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को दिए गए कारण बताओ नोटिस के संबंध में उनका अगला कदम क्या होगा।
अधिवक्ता-कार्यकर्ता टी.जे. अब्राहम द्वारा दायर याचिका के आधार पर कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 26 जुलाई को “कारण बताओ नोटिस” जारी किया था, जिसमें मुख्यमंत्री को निर्देश दिया गया था कि वे सात दिनों के भीतर उनके खिलाफ आरोपों पर अपना जवाब प्रस्तुत करें कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति क्यों न दी जाए।
कर्नाटक सरकार ने एक अगस्त को राज्यपाल को मुख्यमंत्री को जारी “कारण बताओ नोटिस” वापस लेने की “दृढ़ सलाह” दी और राज्यपाल पर “संवैधानिक पद का घोर दुरुपयोग” करने का आरोप लगाया।
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