धनखड़ ने विपक्षी सदस्यों के सदन से बहिर्गमन पर अफसोस जताया, कहा : वे आत्मनिरीक्षण करें
अविनाश माधव
- 09 Aug 2024, 06:46 PM
- Updated: 06:46 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों के सदन से बहिर्गमन करने पर अफसोस जताते हुए कहा कि उन्हें गहराई से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
इससे पहले विपक्षी सदस्यों ने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं देने का आसन पर आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया था।
सभापति ने कहा कि सदन में आज जो दृश्य बना, उसका पूरा सदन गवाह बना और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा सहित वरिष्ठतम सदस्यों ने इस संबंध में अपनी पीड़ा व्यक्त की।
धनखड़ ने कहा, ‘‘मैंने सदन की कार्यवाही इस बात को ध्यान में रखते हुए स्थगित की ताकि सदन सभी सदस्यों के उपस्थित होने पर ही बेहतर ढंग से कार्य किया जा सके। सदन के प्रत्येक सदस्य ने संविधान के तहत शपथ ली है और उन्हें व्यापक जन सेवा का दायित्व मिली है। दुर्भाग्यवश, तीनों विचारों पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए काम जारी रखूंगा ताकि उन्हें अवसर मिल सके, वे अपना संवैधानिक कर्तव्य निभा सकें, अपनी ऊर्जा और विशेषज्ञता तथा अनुभव का उपयोग भारत के कल्याण के लिए, लोगों की सेवा करने में कर सकें।’’
सभापति ने कहा कि वह उन सदस्यों से अपील करते हैं जो सदन में लिए गए निर्णय के कारण यहां उपस्थित नहीं हैं, वे उच्च सदन की गौरवशाली परंपरा को ध्यान में रखते हुए अपने भीतर गहराई से आत्मनिरीक्षण करें।
उन्होंने कहा कि जब सदन स्थगित था, तो मुझे विभिन्न टीवी चैनलों पर सदस्यों की प्रतिक्रिया देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, ‘‘मैं लोगों को सूचित करना चाहता हूं कि इस संस्था के प्रति सम्मान के कारण, इस सदन के प्रत्येक सदस्य की गरिमा के प्रति सम्मान के कारण, मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए उचित सतर्कता बरती है कि ऐसा व्यवहार, ऐसा आचरण जो संसद सदस्य के लिए उचित नहीं है, लोकतंत्र के मंदिर से बाहर नहीं जाए।’’
धनखड़ ने कहा कि संसद टीवी के पास इस सदन में होने वाली सभी (गतिविधियां) दर्ज हैं, वह स्व-नियमन के अधीन है। उन्होंने कहा, ‘‘यह देखते हुए कि एक विमर्श पैदा करने की कोशिश की जा रही है...और जो तथ्य पर आधारित नहीं हो सकता। यह उन सदस्यों द्वारा बोला जा रहा है जिनके पास काफी अनुभव है। मैं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करूंगा कि देश के लोगों को वास्तविकता का पता चले।’’
उन्होने कहा कि वह हर सदस्य का बहुत सम्मान करते हैं और किसी के साथ भी उनका कोई व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है, वह बिना किसी आधार के असंयमित भाषा से बहुत आहत हैं।
उन्होने बहिर्गमन करने वाले सदस्यों से आत्मचिंतन व आत्मनिरीक्षण, राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य के बारे में सोचने, संविधान के तहत अपनी शपथ पर चिंतन और आगामी सत्रों में रचनात्मक तरीके से जोरदार भागीदारी के लिए तैयारी करने की अपील की।
भाषा अविनाश