रास में सत्ता पक्ष ने की विपक्षी सदस्यों के आचरण की निंदा
मनीषा माधव
- 09 Aug 2024, 06:40 PM
- Updated: 06:40 PM
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को सदन में विपक्षी पार्टी के सदस्यों के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे संविधान की कीमत पर अपनी बात मनवाने पर अड़े हैं।
उच्च सदन की कार्यवाही दोपहर में निर्धारित समय से पहले अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले सदन में हंगामा और नोंकझोंक हुई। विपक्षी सदस्यों ने पिछले सप्ताह खड़गे का कथित रूप से अपमान करने के लिए भाजपा सांसद घनश्याम तिवाड़ी से माफी मांगने की मांग की थी, जिसे धनखड़ ने खारिज कर दिया।
धनखड़ ने कहा कि तिवाड़ी ने खरगे की प्रशंसा की है। इसी बीच कांग्रेस के जयराम रमेश ने कुछ कहना चाहा। सभापति ने उन्हें अनुमति नहीं दी।
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि तिवाड़ी की जो टोन (लहजा) थी और जो शब्द उन्होंने कहे थे वे संसद की गरिमा के अनुरूप नहीं थे।
इसी बीच रमेश ने कुछ कहा जिस पर सभापति ने नाराजगी जाहिर करते हुए रमेश को कहा कि वह उनका नाम लेंगे।
राज्यसभा की नियमावली के अनुसार, अगर किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे सदन से बाहर जाना होता है और फिर वह उस दिन सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकता।
सभापति ने जब जयराम रमेश से कहा कि वह उनका नाम लेंगे तो कांग्रेस के अजय माकन ने कहा ‘‘नाम क्यों लिया जाएगा। नेता विपक्ष के साथ जो हुआ, वह सदन के संज्ञान में लाने के लिए क्या सदस्य का नाम लिया जाएगा ? आप हमें कहते हैं कि हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? हम हंस क्यों रहे हैं?’’
इस दौरान सभापति ने द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा को अपनी बात रखने के लिए कहा। शिवा ने कहा कि बोलने बोलने में भी अंतर होता है और इस बात को समझना चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘लहजा मायने रखता है। यही बात विपक्ष के नेता पर भी लागू होती है।’’
सभापति ने सपा सदस्य जया बच्चन को अपनी बात रखने की अनुमति दी। जया ने सभापति के बोलने के लहज़े पर आपत्ति जताई। सभापति ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जैसी सेलिब्रिटी को भी शिष्टाचार का पालन करने की जरूरत है।
एक सदस्य ने कहा कि सदन में वह (जया) सेलिब्रिटी नहीं बल्कि वरिष्ठ सदस्य हैं। इस पर सभापति ने कहा कि संसद के वरिष्ठ सदस्य के पास क्या आसन की गरिमा को गिराने का लाइसेंस होता है ?
सभापति ने अपने लहजे, अपनी आदत, अपने मिजाज को लेकर सदस्यों की टीका टिप्पणियों पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपने अनुसार, सदन के नियमों के अनुसार चलेंगे।
जया बच्चन ने भी कुछ कहना चाहा लेकिन सभापति ने उन्हें अनुमति नहीं दी।
इस बीच विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। धनखड़ ने खरगे से कहा, " आप संविधान की कीमत पर अपना रास्ता निकालने के लिए अड़े हैं। यह शिष्टाचार की कमी, लोकतंत्र तथा संविधान का अनादर है। राष्ट्र प्राथमिकता है, राष्ट्र हमेशा पहले है...।"
सभापति ने कहा ‘‘मैं जानता हूं कि आप पूरे देश को अस्थिर करना चाहते हैं। आप सदन में अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं। मैं इस सदन को हंगामे की जगह नहीं बनने दूंगा।’’
इसके बाद विपक्षी सदस्य विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।
धनखड़ ने कहा कि उनका (विपक्षी सदस्यों का) यह आचरण लोकतंत्र और सदन का अपमान है और वे अपनी जिम्मेदारी तथा दायित्वों से भाग रहे हैं।
सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा ‘‘केवल सत्ताधारी दल ही नहीं बल्कि पूरा देश सभापति के साथ खड़ा है। विपक्ष ने बेहद गैर जिम्मेदाराना, अशोभनीय आचरण किया है।’’
उन्होंने कहा कि विपक्ष को माफी मांगनी चाहिए और उन्हें सदन की उस गरिमा के अनुरूप आचरण करना चाहिए जिसकी वे बार बार दुहाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि सदन में आज जो कुछ हुआ, उसकी वह निंदा करते हैं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व प्रधानमंत्री और जद(एस) के एच डी देवेगौड़ा, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी, कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले, टीएमसी (एम) जी के वासन, जद(यू) के संजय कुमार झा, बीआरएस के के सुरेश रेड्डी तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने भी विपक्षी सदस्यों के आचरण की निंदा की।
सभापति धनखड़ ने कहा ‘‘यह आचरण एक वायरस की तरह है। अगर इस वायरस को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक होगा। वे (विपक्षी सदस्य) मेरा नहीं बल्कि देश की जनता का अपमान करते हैं। मैं हर दिन सोचता हूं कि मैं और लचीलापन रखूंगा। लेकिन एक सीमा के बाद तो भगवान कृष्ण भी नजर अंदाज नहीं कर सकते।’’
सभापति ने कहा, ‘‘मैं भगवान कृष्ण नहीं हूं, मुझे सदन का सहयोग चाहिए।’’
सदन के नेता नड्डा ने कहा, ‘‘प्रजातंत्र के मूल्यों का इस तरह से हनन नहीं होना चाहिए। मैं चाहूंगा कि सदन इस बारे में निंदा प्रस्ताव पारित करे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करना इस सदन का दायित्व है। सदन आज की घटना की सर्वसम्मति से निंदा करता है।’’
इसके बाद सभापति ने बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। हंगामे की वजह से सदन में प्रश्नकाल नहीं हो पाया।
सदन की कार्यवाही भोजनावकाश के बाद दोपहर दो बजे से साढ़े तीन बजे के बीच तीन बार आधे आधे घंटे के लिए स्थगित की गई।
भाषा
मनीषा