भारत को घरेलू विमानन बाजार में नंबर एक देश बनाना सरकार की प्राथमिकता: नायडू
सुरेश सुरेश वैभव
- 09 Aug 2024, 06:05 PM
- Updated: 06:05 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) नागर विमानन मंत्री किंजरप्पा राममोहन नायडू ने शुक्रवार को कहा कि हवाई सेवा को तरजीह देना समय की मांग है और सरकार की प्राथमिकता भारत को घरेलू विमानन बाजार में नंबर-एक देश बनाना है।
नायडू ने कहा कि सरकार ब्रिटिशकालीन विमान अधिनियम की विसंगतियों को न केवल समाप्त करने के प्रति कृत संकल्पित है, बल्कि इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुरूप भी बना रही है।
उन्होंने भारतीय वायुयान विधेयक, 2024 पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा कानून में अपील संबंधी कई विसंगतियां मौजूद हैं, जिसे प्रस्तावित भारतीय वायुयान विधेयक, 2024 के जरिये दुरुस्त करने का प्रयास किया गया है।
नायडू ने कहा कि ब्रिटिशकालीन कानून में केवल वित्तीय जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन सरकार मसौदा कानून में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को समाहित करते हुए प्रशासनिक उपाय को भी तरजीह दे रही है।
उन्होंने नागरिक विमानन सेवा को अंतरराष्ट्रीय मानकों और नीतियों के समीचीन बनाने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी-नीत सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी के कार्यकाल में ‘सिविल एविएशन’ अब ‘सिविलियन एविएशन’ बन गया है।
नायडू ने कहा कि देश में जनसंख्या के बढ़ते घनत्व और चिकित्सा एवं पर्यटन क्षेत्र की विविधताओं के मद्देनजर सरकार की योजना दो स्थानों के बीच ब्राजील की तरह हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की है।
उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर सेवा का दायरा भारत में बहुत व्यापक है और सुसंगत हेलीकॉप्टर के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों की मदद से देश में पर्यटन उद्योग एवं चिकित्सा सेवाओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का बेहतर नेटवर्क बनाया जाएगा और इसके माध्यम से देश में हेलीकॉप्टर सेवा को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
छोटे-छोटे शहरों में हवाई अड्डों के निर्माण की योजना को तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सौगत राय द्वारा ‘दिखावा’ करार दिये जाने संबंधी वक्तव्य पर नायडू ने कहा कि यह दिखावा भर नहीं है, बल्कि यह समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या का निदान आज नहीं किया गया तो भविष्य में बहुत दिक्कत होने वाली है।
उन्होंने विमान किराये में बेतहाशा बढ़ोतरी पर लगाम लगाये जाने की विपक्षी सदस्यों की मांग पर कहा कि विमान किराये में वृद्धि विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें विमान ईंधन, सुरक्षा शुल्क आदि शामिल हैं।
नायडू ने सदन को आश्वस्त किया कि किरायों के मामले में यदि जान-बूझकर विमानन कंपनियों द्वारा किसी तरह की गड़बड़ी की जाती है, तो सदस्य उन्हें संबंधित कंपनियों के नाम एवं सभी आवश्यक जानकारियों के साथ सूचित कर सकते हैं तथा ऐसे मामलों में सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हवाई सेवा को तरजीह देना समय की मांग है और सरकार चाहती है कि भारत घरेलू विमानन बाजार में नंबर-एक देश बने, इसलिए ही पुराने कानून में संशोधन जरूरी है।
विमानन कंपनियों द्वारा सांसदों की सिफारिश के बावजूद सीट ‘अपग्रेडेशन’ न किये जाने को लेकर एक विपक्षी सदस्य के दावे पर मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि ‘सीट अपग्रेडेशन’ का काम 2014 से पहले हुआ करता था और यही वजह है कि विमानन क्षेत्र का हाल बुरा हो गया था। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार में सीट अपग्रेडेशन नहीं, बल्कि एयरपोर्ट अपग्रेडेशन और एयर सर्विस अपग्रेडेशन होता है।’’
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