भारत के लिए पाकिस्तान अब रणनीतिक खतरे की बजाय महज ‘सिरदर्द’ बनकर रह गया है: शौर्य डोभाल
नेत्रपाल संतोष
- 09 Aug 2024, 05:51 PM
- Updated: 05:51 PM
नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं ‘इंडिया फाउंडेशन’ के संस्थापक शौर्य डोभाल ने कहा है कि भारत के लिए पाकिस्तान अब रणनीतिक खतरा होने की बजाय केवल ‘‘सिरदर्द’’ बनकर रह गया है क्योंकि नयी दिल्ली ने अपने पड़ोसी पर बढ़त हासिल कर ली है।
उन्होंने कहा कि भारत की मुख्य बढ़त उसका आर्थिक विकास है, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि इस विकास को आगे बढ़ाने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए पाकिस्तान तथा चीन सहित अन्य पड़ोसियों के साथ संबंधों को प्रबंधित करने की आवश्यकता है।
यहां ‘पीटीआई’ मुख्यालय में संपादकों के साथ बातचीत में डोभाल ने साइबर आतंकवाद से लड़ने के लिए निजी ‘खिलाड़ियों’ को शामिल करने का भी समर्थन किया और कहा कि केवल कानूनी एवं सैन्य उपायों पर निर्भर रहने के बजाय ‘‘व्यापक’’ सामाजिक प्रतिक्रिया की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में विभिन्न बिंदुओं को पार कर लिया है। हालांकि, वे अब भी चुनौतियां पेश करते हैं, लेकिन वे अब एक गंभीर खतरा नहीं हैं... पाकिस्तान अब हमारे लिए एक ‘सिरदर्द’ तो है लेकिन यह हमारे लिए कोई रणनीतिक खतरा पैदा नहीं करता है। तो, यह एक स्थिति सुलझ गई है।’’
डोभाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसी तरह का परिदृश्य भारत के पूर्वी मोर्चे पर है। इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि भारत का उत्तरी पड़ोसी अपनी सैन्य क्षमताओं और इरादों के कारण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है, सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, भारत की मुख्य खासियत अभी आर्थिक विकास है... हमें अपने पड़ोस का प्रबंधन करना है ताकि पड़ोसियों की तुलना में हमें अपने आर्थिक लक्ष्य तक पहुंचने और रणनीतिक लाभ हासिल करने में सक्षम होने के लिए वह स्थान और समय मिलता रहे।’’
डोभाल ने कहा, ‘‘अगर हमारा उत्तरी पड़ोसी वैश्विक मंच पर दबदबा बनाने की इच्छा रखता है, तो वे भारत को उसकी वर्तमान स्थिति तक ही सीमित देखना पसंद करेंगे।’’
इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक ने कहा, ‘‘अगर वे हमारे क्षेत्र में अपनी उपस्थिति स्थापित करने में विफल रहते हैं, तो उनकी वैश्विक महत्वाकांक्षाएं बाधित हो सकती हैं।’’
यह रेखांकित करते हुए कि आर्थिक विकास भारत की प्राथमिक ताकत है, उन्होंने कहा, ‘‘हमें आर्थिक प्रगति के लिए जगह बनाने और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए अपने पड़ोस को प्रबंधित करना चाहिए।’’
उन्होंने भारत और उसके पड़ोसियों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी एवं बुनियादी ढांचे सहित आर्थिक अंतर को पाटने के लिए एक केंद्रित प्रयास पर जोर दिया और कहा कि भारत इस दिशा में प्रगति कर रहा है।
आतंकवाद से मुकाबले के मुद्दे पर डोभाल ने कहा कि इसे केवल सरकार की जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद स्कूलों से लेकर अस्पतालों तक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में घुसपैठ कर सकता है और इसके लिए हमारे राष्ट्र को तैयार करने तथा उसकी रक्षा करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।’’
डोभाल ने साइबर अपराध और आतंकवाद से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष रूप से निजी क्षेत्र में भारत की प्रौद्योगिकी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता की वकालत की।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने नवोन्मेषकों और ‘कोडर्स’ को आतंकवाद रोधी प्रयासों में नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए, खासकर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में।’’
डोभाल ने कहा कि सरकारी प्रणालियां अकसर निजी क्षेत्र में पाए जाने वाले तीव्र नवाचार के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष करती हैं। उन्होंने सामाजिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करने और इन चुनौतियों से निपटने में राजनीतिक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत उन कुछ देशों में से एक है जो इस प्रौद्योगिकी लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हैं। अगर हम इस अवसर पर आगे नहीं बढ़ सकते, तो कौन बढ़ेगा?’’
डोभाल ने उभरते खतरों के सामने नवाचार और सुरक्षा के लिए एकजुट दृष्टिकोण का आग्रह किया।
भाषा
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