लोकसभा: सांसदों ने बढ़ते हवाई किराये पर सरकार के नियंत्रण, पारदर्शी नागर विमानन नीति की जरूरत बताई
वैभव सुरेश वैभव सुरेश
- 08 Aug 2024, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) लोकसभा में बृहस्पतिवार को अनेक सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि विमान यात्रा के बढ़ते किरायों पर सरकार का नियंत्रण होना चाहिए और विमानन क्षेत्र के विकास तथा इसे लाभ में लाने के लिए एक पारदर्शी नागर विमानन नीति होनी चाहिए।
लोकसभा में भारतीय वायुयान विधेयक, 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी के राजीव राय ने कहा कि देश में हवाई अड्डा सुरक्षा के आधुनिकीकरण की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जब हवाई किराये में वृद्धि का सवाल उठता है तो सरकार का कहना होता है कि हवाई किराया उनके नियंत्रण में नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा है तो सरकार ‘हवाई चप्पल पहनने वाले को हवाई जहाज में बैठाने’ का नारा क्यों देती है।
सपा सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी हवाई अड्डों के निजीकरण के सख्त खिलाफ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम संपत्तियां बनाने में विश्वास करते हैं, उन्हें बेचने में नहीं।’’
तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने विमानन क्षेत्र के विकास और उड़ान कंपनियों को लाभ में लाने के लिए एक पारदर्शी नागर विमानन नीति की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि सरकार छोटे शहरों में हवाई अड्डे और छोटे स्थानों के बीच उड़ानों के परिचालन पर जोर दे रही है, लेकिन ऐसा केवल प्रतिष्ठा के लिए किया जा रहा है, क्योंकि इनसे कोई फायदा नहीं हो रहा।
राय ने कहा कि हवाई अड्डों की संख्या और छोटे-छोटे शहरों के बीच विमान परिचालन को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाएं, व्यावहारिकता के साथ काम करें।
उन्होंने विधेयक के हिंदी नाम पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने नए विधेयक में कुछ भी नई बात शामिल नहीं की है, बल्कि सिर्फ इसे नए तरीके से लिखा है और इसका हिंदी नामकरण किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘नाम बदलने से हिंदी नहीं बढ़ेगी। हम बांग्ला भाषी हैं, हमें यह नाम समझ में नहीं आता।’’
राय ने भी हवाई किरायों में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सरकार का इस पर नियंत्रण नहीं है तो नागर विमानन मंत्रालय का क्या काम है।
द्रमुक के सी एन अन्नादुरई ने विमान दुर्घटनाओं और उनकी समयबद्ध जांच को लेकर स्पष्ट नीति की जरूरत बताई।
चर्चा में भाग लेते हुए तेलुगु देशम पार्टी के एम श्रीनिवासुलू रेड्डी ने भी बढ़ते हवाई किरायों पर सरकार के नियंत्रण की जरूरत बताई।
शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बारणे ने कहा कि विमानन कंपनियां कई मुद्दों पर मनमानी करती हैं और विमान सेवाएं निरस्त होने पर यात्रियों को रिफंड मिलने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इगरुआ) को 2015 से अभी तक केंद्र की ओर से अनुदान नहीं मिलने की बात कही।
उन्होंने कहा कि यह एक प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान है, लेकिन अनुदान नहीं मिलने की वजह से इसकी हालत खराब है।
शर्मा ने कहा कि सरकार को नए उड़ान प्रशिक्षण संस्थान बनाने से पहले मौजूदा प्रशिक्षण संस्थानों पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने अपने क्षेत्र में स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के संबंध में भी कुछ कथित अनियमितताओं की ओर इशारा किया और सरकार से इस ओर ध्यान देने की मांग की।
सदस्यों ने नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह युवा हैं, उच्च शिक्षित हैं और सभी को उनसे विमानन क्षेत्र में अनेक नए कार्यों की उम्मीद है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सदस्य वी सेल्वाराज और विदुथलाई चिरूथईगल काची के सांसद डी रवि कुमार ने भी विमानन नीतियों की आलोचना की।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एन. के प्रेमचंद्रन ने हिन्दी में विधेयक का शीर्षक दिये जाने का विरोध किया और इसे दक्षिण भारतीय राज्यों पर हिन्दी थोपने का प्रयास करार दिया।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद में शीर्षक को अंग्रेजी में देना अनिवार्य किया गया है लेकिन सरकार ने सोची समझी नीति के तहत विधेयक का हिन्दी में शीर्षक किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह दक्षिण भारतीय राज्यों पर हिन्दी थोपने का प्रयास है।
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