संसदीय समिति ने आधार, पैन कार्ड के दुरुपयोग से निपटने के सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की मांग की
अविनाश सुरेश
- 07 Aug 2024, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्य सभा की एक समिति ने विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों के लिए आधार, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र जैसे जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर बुधवार को चिंता जताई और इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की मांग की।
राज्यसभा की सरकारी आश्वासन संबंधी समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में डेटा की सुरक्षा, विशेष रूप से मतदाता सूची और आधार कार्ड को लेकर चिंता व्यक्त की।
राज्यसभा में बुधवार को पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति के अध्यक्ष ने विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों जैसे कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करना, पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, धोखाधड़ी, अवैध भूमि सौदे करना, धनशोधन, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि के जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर गौर किया।’’
अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै इस समिति के अध्यक्ष हैं। सरकारी आश्वासनों से संबंधित समिति राज्यसभा पटल पर मंत्रियों द्वारा रखे गए आश्वासनों की समीक्षा करती है और आश्वासनों को पूरा करने संबंधी कार्यान्वयन प्रतिवेदनों की जांच करती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समिति ने महसूस किया कि आधार कार्ड सत्यापन प्रक्रिया, मतदाता सूचियों की ‘क्रॉस-चेकिंग’ और ऐसे अन्य डेटा केंद्रों को मजबूत करना आवश्यक है। अध्यक्ष ने फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और दुरुपयोग का पता लगाने एवं उन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के साथ-साथ इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की मांग की।’’
समिति ने मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के प्रतिनिधियों से धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग के मामलों की जांच और समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, ‘‘व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्न उपायों पर ध्यान देते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि मामले का सच यह है कि छात्र व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए इतने उत्सुक नहीं हैं, क्योंकि उन्हें ऐसे पाठ्यक्रम सही नहीं लगते हैं और शायद उन्हें ऐसे पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद सम्मानजनक और आकर्षक रोजगार मिलने की आशा नहीं होती।’’
समिति के अनुसार, ‘‘अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल एक विडंबना है कि सिविल इंजीनियरिंग, वास्तुकला आदि जैसे कई क्षेत्रों में कुशल श्रम शक्ति की मांग है, लेकिन कम ही छात्र इन क्षेत्रों में ऐसे पाठ्यक्रम ले रहे हैं। इसके अलावा, देश में इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में जनशक्ति की कमी के बावजूद, कई पेशेवर विदेश जाने का विकल्प चुन रहे हैं।’’
समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने के उपाय करने की सलाह दी कि अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में अच्छी गुणवत्ता वाले फिजियोथेरेपिस्ट नियुक्त किए जाएं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि केवल उन्हीं संस्थानों को फिजियोथेरेपी में विभिन्न पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति दी जाए जिनके पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा हों और जो निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हों।
समिति ने उम्मीद जताई की कि देश में सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले फिजियोथेरेपिस्ट तैयार करने से न केवल बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि जब ये विदेशों में अपनी सेवाएं देंगे तो देश का नाम भी रोशन होगा।
भाषा अविनाश