विनेश फोगाट के संबंध में बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर विपक्ष ने राज्यसभा से बहिर्गमन किया
अविनाश सुरेश
- 07 Aug 2024, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने महिला पहलवान विनेश फोगाट के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए और इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर सदन से बहिर्गमन किया।
महिलाओं की 50 किलोग्राम कुश्ती स्पर्धा के फाइनल से पहले वजन अधिक पाए जाने के कारण विनेश को ओलम्पिक से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे सहित विपक्षी सदस्यों के आचरण की आलोचना की और उन पर आसन के अधिकार को "चुनौती" देने तथा "अपने संवैधानिक कर्तव्य से दूर होने" का आरोप लगाया।
विनियोग (संख्या दो) विधेयक 2024 और जम्मू-कश्मीर विनियोग (संख्या तीन) विधेयक, 2024 पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य फोगाट के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाने लगे। लेकिन धनखड़ ने उन्हें अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी।
खरगे ने कहा कि वह एक मुद्दे पर सभापति की अनुमति से बोलना चाहते हैं, लेकिन धनखड़ ने अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि बहस जारी रहेगी।
सभापति ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी नियम का सहारा लिए हस्तक्षेप करना चाहते थे।
विपक्षी सदस्यों के सदन से बाहर चले जाने के बाद धनखड़ ने कहा कि उनका कृत्य "अशोभनीय और आसन के अधिकार को चुनौती देने वाला" था।
उन्होंने कहा, "नेता प्रतिपक्ष का, संसदीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण आधार... बहुत दुखद... इस तरह के आचरण पर आपत्ति जताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।"
उन्होंने कहा कि सदन में जिस तरह की नारेबाजी देखी गई, वह सबसे खराब स्थिति में भी नहीं होती है।
धनखड़ ने कहा कि उन्होंने विपक्ष के नेता को एक कोरा कागज भेजा था, ताकि वह अपना विषय बता सकें, जिस पर वह बोलना चाहते थे। उन्होंने कहा, "श्री प्रमोद तिवारी नेता प्रतिपक्ष के बगल में बैठे हैं और मुख्य विपक्षी दल के उपनेता हैं। उन लोगों ने इस देश पर काफी समय तक शासन किया है और उन्हें प्रक्रिया और आचरण के नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।"
धनखड़ ने नोट पढ़ा, जिसमें देशवासियों को प्रभावित करने वाले एक आकस्मिक मुद्दे को उठाने और थोड़े समय के लिए हस्तक्षेप करने के विपक्ष के नेता के अनुरोध का उल्लेख किया गया था।
सभापति ने कहा, "कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है। इस तरह का दृष्टिकोण केवल राजनीतिक लाभ के लिए मंच का उपयोग करना है। यह संवाद, बहस और चर्चा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मंच है। हर बार आसन को चुनौती देने की उभरती प्रवृत्ति पर मुझे आपत्ति है।’’
धनखड़ ने कहा कि संविधान के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी दिखाने के लिए राज्यसभा भेजे गए सांसदों के आचरण से देश के लोग स्तब्ध रह जाएंगे।
सभापति ने कहा, ‘‘ये खतरनाक प्रथाएं हैं, जिनसे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए खतरा पैदा होता है... अगर नेता प्रतिपक्ष इसका केंद्र हो सकते हैं, तो इससे ज्यादा अफसोसजनक क्या हो सकता है? आसन पर जो भी बैठते हैं, उनका सम्मान किया जाना चाहिए।
सभापति ने विपक्षी सदस्यों के आचरण पर "गहरी पीड़ा" व्यक्त की और कहा कि जो लोग सदन से बाहर चले गए, वे अपने संवैधानिक कर्तव्य से विमुख हो गए।
चर्चा के दौरान ‘‘वन रैंक वन पेंशन’’ (ओआरओपी) योजना पर सभापति की टिप्पणी के बाद धनखड़ और कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश के बीच भी नोकझोंक हुई।
तिवारी ने कहा कि ओआरओपी के लिए सेनाओं को 1.41 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जिस पर धनखड़ ने कहा कि यह राशि पहले मिलने वाली राशि से कहीं अधिक है।
धनखड़ ने जाहिरा तौर पर पिछली संप्रग सरकार का संदर्भ देते हुए कहा, "एक सरकार थी जिसने इसके लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।"
रमेश ने सभापति की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। इस पर धनखड़ ने कहा कि उन्होंने जो कुछ कहा, वह पहले से ही संसद के रिकॉर्ड में है।
सभापति ने कहा, "यहां एक सदस्य हैं जिन्हें सभापति को एक राजनीतिक दल का प्रवक्ता कहने में कोई झिझक नहीं है... आप (रमेश) प्रोटोकॉल का पालन करें। अपने दोस्तों से पूछो। वे बहुत अनुभवी हैं। वे आपको बताएंगे कि आपने आज क्या गलती की है। आपकी गलती की वजह से मुझे बजटीय प्रावधान का सहारा लेना पड़ा है।’’
भाषा अविनाश