पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों में 4,264 खारिज किए गए: सरकार
राजेश राजेश अविनाश
- 07 Aug 2024, 08:58 PM
- Updated: 08:58 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) सरकार ने बुधवार को कहा कि ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन पोर्टल’ पर प्राप्त आवेदनों में से लगभग 4,264 आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। कोविड महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों के लिए इस योजना के तहत इन आवेदनों की अस्वीकृति का कारण अपात्रता बताया गया है।
यह योजना 11 मार्च, 2020 के बाद माता-पिता या कानूनी अभिभावक खो देने वाले बच्चों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई थी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राज्यसभा को बताया कि 33 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 613 जिलों से ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन पोर्टल’ पर 9,331 आवेदन पंजीकृत किए गए हैं।
उन्होंने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को बताया कि इनमें से 524 आवेदन ‘डुप्लिकेट’ थे।
मंत्री ने कहा कि इस प्रकार, जिला स्तरीय बाल कल्याण समितियों और जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) द्वारा 8,807 आवेदनों की समीक्षा की गई।
देवी ने कहा कि उन अधिकारियों की अंतिम मंजूरी के आधार पर 4,532 लाभार्थियों को योजना के तहत लाभ मिल रहा है और 11 अन्य आवेदनों पर लाभ जारी किए जाएंगे।
शेष 4,264 आवेदन पात्र नहीं पाए गए। हालांकि, योजना के तहत पंजीकरण अभी भी खुला है ताकि कोई भी पात्र आवेदक छूट न जाए।
देवी ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय योजना के तहत लाभ जारी करने के लिए डीएम द्वारा अनुमोदित या अंतिम रूप दिए गए मामलों पर कार्रवाई करता है। पात्रता के लिए किसी भी आवेदन पर केंद्र सरकार के स्तर पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
देवी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पीएम-केयर कार्यक्रम में वर्ष 2021 में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में कुल 6,360 लाभार्थियों के साथ बड़ी संख्या में आवेदन आए। इनमें से 3,953 को डीएम ने मंजूरी दी, 1,985 को खारिज कर दिया और 422 को डुप्लिकेट घोषित किया गया।
महाराष्ट्र में सबसे अधिक 1,107 पंजीकरण हुए, जिनमें 713 को मंजूरी मिली। आंकड़ों से पता चला कि आंध्र प्रदेश में 473 पंजीकृत लाभार्थी थे, जिनमें से 338 को मंजूरी मिली, जबकि दिल्ली में 266 पंजीकरण हुए, जिनमें से केवल 124 को मंजूरी मिली।
हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल थे, जहां स्वीकृति दर अधिक थी, जबकि बिहार और ओडिशा में अस्वीकृति दर उल्लेखनीय रूप से अधिक थी।
पिछले वर्ष की तुलना में वर्ष 2022 में पंजीकरण की संख्या में गिरावट आई।
वर्ष 2022 में कुल 2,754 पंजीकृत लाभार्थी थे, जिनमें से 454 को मंजूरी मिली, 2,205 को खारिज किया गया और 95 डुप्लिकेट थे।
वर्ष 2022 में, राजस्थान में 1,253 पंजीकरण हुए, लेकिन केवल 13 को मंजूरी मिली। महाराष्ट्र में 388 पंजीकरण हुए, जिनमें से 128 को मंजूरी मिली और आंध्र प्रदेश में 38 लाभार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें से 13 को मंजूरी मिली।
वर्ष 2023 में, पंजीकरण में काफी गिरावट आई और बिहार में 12 पंजीकरण और नौ स्वीकृतियां दर्ज की गईं। दिल्ली ने आठ बच्चों को पंजीकृत किया, जिनमें से सभी को योजना के तहत लाभार्थियों के रूप में अनुमोदित किया गया।
आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश ने 69 लाभार्थियों को पंजीकृत किया, जिसमें केवल चार को स्वीकृति मिली। महाराष्ट्र में 16 पंजीकरण थे, जिनमें 14 को स्वीकृति मिली।
वर्ष 2024 के लिए अब तक, संख्या में और कमी आई है।
भाषा राजेश राजेश