राज्यसभा में वामपंथी दलों ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को घेरा
ब्रजेन्द्र अविनाश
- 07 Aug 2024, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को वामपंथी दलों ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया और कहा कि केंद्रीय बजट में आम आदमी को नजरअंदाज कर उद्योगपतियों पर ‘प्यार’ बरसाया गया है।
उच्च सदन में विनियोग (संख्यांक दो) विधेयक 2024 और जम्मू कश्मीर विनियोग (संख्यांक तीन) विधेयक 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जॉन ब्रिटास ने कहा कि बजट के बारे में सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्य इस प्रकार की बातें कर रहे हैं मानो भारत स्वर्ग बन गया हो जबकि असलियत में यह देश महंगाई और बेरोजगारी का दंश झेल रहा है।
उन्होंने कहा कि महंगाई इस कदर बढ़ गई है कि शाकाहारी थाली की कीमतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जब महंगाई बढ़ती है तो लोगों की खरीदने की क्षमता घटती है। उन्होंने कहा कि कार्पोरेट कर का योगदान 2018-19 में जीडीपी का 3.5 प्रतिशत था, जो अब 3.1 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने कहा कि उद्योगपतियों का मुनाफा कई गुना बढ़ा है।
ब्रिटास ने कहा कि रेल व हवाई किरायों के साथ स्कूलों के फीस में भी भारी वृद्धि हुई है और आम आदमी इनसे परेशान है।
उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई का अंदाजा होता तो वह इस प्रकार का बजट नहीं पेश करती।
बेरोजगारी की समस्या का उल्लेख करते हुए माकपा सदस्य ने कहा कि बिहार में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या महज तीन फीसदी बताई गई है। उन्होंने कहा, ‘‘यह आंकड़े देखकर मैं चौंक गया। क्या बिहार अमेरिका बन गया है। अमेरिका में भी बेरोजगारी दर इससे कहीं अधिक है। या फिर सरकार को कहना चाहिए था कि बिहार के सभी युवा अशिक्षित हैं। दोनों में से कोई एक ही सच होगा।’’
उन्होंने कहा कि यह आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों की वास्तविक तस्वीर है।
उन्होंने कहा कि इस बजट में एक पर्यटन सर्किट बनाए जाने की घोषणा की गई है लेकिन इसमें केरल को शामिल नहीं किया गया है।
वायनाड़ में भूस्खलन का जिक्र करते हुए उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं पर केरल को अपमानित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों भूपेंद्र यादव और अमित शाह ने अपने बयानों से केरल को अपमानित किया।
हालांकि, यादव ने बाद में उनके आरोपों का खंडन किया और उसे कार्यवाही से बाहर निकाले जाने की मांग की।
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने भी ब्रिटास के आरोपों को सत्य से परे करार दिया।
माकपा के ही वी शिवदासन ने कहा कि बजट में आम आदमी का उपयुक्त ध्यान नहीं रखा गया है जबकि उद्योगपतियों पर ‘प्यार’ बरसाया गया है।
उन्होंने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि इससे अस्पतालों और उसके संसाधनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सों की कमी का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने केंद्र पर केरल के साथ भेदभाव बरतने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य में एम्स की स्थापना की मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि केरल के लिए कोई विशेष पैकेज की घोषणा नहीं करना भी दर्शाता है कि केंद्र सरकार इस राज्य को किस नजरिए से देखती है।
उन्होंने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के लिए भी केंद्र पर निशाना साधा और इसके निराकरण में असफल रहने का आरोप लगाया।
इण्डियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के अब्दुल वहाब ने वायनाड की घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं करने की गुजारिश की और केंद्र सरकार से केरल को अधिक से अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि कश्मीर में स्थिति में बहुत सुधार हुआ है तो उसे केरल और कश्मीर के बीच हवाई यात्रा शुरु करनी चाहिए।
चर्चा में भाग लेते हुए मनोनीत सदस्य सतनाम सिंह संधू ने बजट का समर्थन किया और कहा कि यह वंचितों व शोषितों की आकांक्षाओं का बजट है और गरीब, युवा, महिला और अन्नदाताओं पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि यह विकसित भारत की यात्रा में मील का पत्थर भी है।
उन्होंने कुछ विदेशी संस्थाओं द्वारा रिपोर्ट पेश किए जाने का उल्लेख किया और दावा किया कि कुछ संस्थाएं भारत को बदनाम करने के लिए इस प्रकार की रिपोर्ट प्रकाशित करती हैं। उन्होंने ऐसी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने पंजाब में पानी के गिरते स्तर पर चिंता भी जताई।
भारतीय जनता पार्टी के सिकंदर कुमार ने कहा कि बजट में विभिन्न विभागों के लिए किए गए आवंटन से रोजगार और उत्पादन बढ़ेगा तथा देश का हर क्षेत्र व वर्ग इससे लाभान्वित होगा।
चर्चा में भाग लेते हुए बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत तमाम स्कूलों ने गरीब वर्ग के बच्चों को प्रवेश देना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून में निशुल्क प्रवेश, निशुल्क शिक्षा और निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का भी प्रावधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने गरीब बच्चों के लिए शिक्षा की फीस शून्य करने की मांग की। उन्होंने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बजट में अधिक प्रावधान किए जाने की भी मांग की।
भाषा ब्रजेन्द्र माधव
ब्रजेन्द्र