बजट महंगाई, बेरोजगारी व आम लोगों से जुड़े मुद्दों का हल करने में नाकाम रहा : विपक्ष
अविनाश माधव
- 07 Aug 2024, 05:54 PM
- Updated: 05:54 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि मौजूदा वित्त वर्ष का बजट महंगाई, बेरोजगारी सहित आम लोगों से जुड़े मुद्दों का हल करने में नाकाम रहा है। वहीं सत्ता पक्ष ने जोर दिया कि इस बजट में गरीब, किसान, युवा एवं समाज के सभी तबकों का ख्याल रखा गया है।
उच्च सदन में विनियोग (संख्यांक दो) विधेयक 2024 और जम्मू कश्मीर विनियोग (संख्यांक तीन) विधेयक 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है न कि उद्योग प्रधान और सरकार को यह बात समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कृषि होनी चाहिए।
गोहिल ने खेती से जुड़ी चीजों पर जीएसटी लगाए जाने का विरोध किया और इसे हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार प्लैटिनम पर उत्पाद शुल्क में कमी करती है लेकिन खेती से संबंधित चीजों पर लगने वाली जीएसटी में कमी नहीं करती।
उन्होंने सिंथेटिक हीरे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को इस पर नियंत्रण करने की जरूरत है क्योंकि सिंथेटिक हीरे का असर गुजरात के सूरत में दिखने लगा है और हीरे की पॉलिश वाले कारखाने बंद होने लगे हैं।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार का दावा था कि संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में शांति हो जाएगी लेकिन वहां कहां शांति है। उन्होंने अग्निवीर योजना का भी विरोध किया और कहा कि यह उचित योजना नहीं है।
उन्होंने गृह एवं सहकारिता मंत्रालयों को एक साथ करने पर भी आपत्ति जतायी और कहा कि दोनों में कोई सह-संबंध ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय साथ होते थे।
गोहिल ने सरकार पर हमला बोलते हुए पहलवान विनेश फोगाट का भी जिक्र किया और कहा कि जब वह न्याय मांग रही थी, उस समय सरकार क्या कर रही थी।
उन्होंने कहा कि इस सरकार के 10 साल हो गए और वह किस बात के लिए पुरानी सरकारों को गाली देती रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि उसने 10 साल में क्या किया।
चर्चा में भाग लेते हुए अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने तमिलनाडु के मछुआरों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार में हुए घेाटालों की जांच कराने की भी मांग की।
अन्नाद्रमुक सदस्य जब अपनी बात रख रहे थे, उसी दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुछ बोलने का प्रयास किया लेकिन सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें अनुमति नहीं दी। सभापति ने कहा कि इस समय विनियोग विधेयक पर चर्चा चल रही है और चर्चा के मध्य में कोई मुद्दा उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और कुछ देर बाद विपक्ष के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।
सभापति धनखड़ ने हंगामा करने वाले सदस्यों के आचरण पर अफसोस जताया और कहा कि बार-बार आसन के प्राधिकार को चुनौती देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चर्चा के बीच राजनीतिक लाभ के लिए हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि यहां के सदस्यों का आचरण अनुकरणीय होना चाहिए।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सदस्य भुवनेश्वर कालिता ने कहा कि इस सरकार की प्राथमिका सामाजिक न्याय है और बजट में रोजगार पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के विभिन्न कदमों के कारण विनिर्माण क्षेत्र में खासी प्रगति हुई है और मोबाइल फोन जैसे क्षेत्र में देश पहले नंबर पर है।
उन्होंने स्मार्ट सिटी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी वजह से कई शहरों में व्यापक बदलाव महसूस किया जा रहा है। उन्होंने अपने शहर गुवाहाटी का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह बदलाव हुआ शहर है।
ऊर्जा क्षेत्र को विकास के लिए अहम बताते हुए कालिता ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों सहित देश के विभिन्न हिस्सों में आधारभूत ढांचा विकसित करने पर जोर दिया है। 1962 के चीन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सीमाओं पर भी आधारभूत ढांचा तैयर कर रही है तथा दुर्गम क्षेत्रों में सुरंग तथा सड़कों का निर्माण कर रही है।
कालिता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास, प्रगति, आर्थिक सुधारों और आत्मनिर्भरता की राह में है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास पर भी ध्यान दिया है और उस क्षेत्र के सभी राज्यों तक रेल सेवाएं पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में हवाई यात्रा के क्षेत्र में भी सुगमता आयी है और देश में हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर 149 हो गयी है।
द्रमुक सदस्य ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार बचाने के लिए और सहयोगियों को खुश करने के लिए है। उन्होंने जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग की और कहा कि आखिरी बार यह जनगणना 1931 में हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में तमिलनाडु की अनदेखी की गयी।
राजद के मनोज झा ने भी जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग की और कहा कि ऐसा होने पर भी पता लग सकेगा कि किस वर्ग की क्या स्थिति है।
मनोज झा ने मनरेगा मद में आवंटन बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने रेलवे में करीब 20 हजार कुलियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तत्कालीन रेल मंत्री और उनकी पार्टी के नेता लालू प्रसाद ने कुलियों को समूह घ की सेवा में शामिल करने की घोषणा की थी। उन्होंने कुलियों को विभिन्न पदों पर समायोजित करने की मांग की।
भाकपा के संतोष कुमार पी ने कहा कि यह बजट लोगों को निराश करने वाला है। उन्होंने कहा कि बजट में केरल की अनदेखी की गई है और उसे उसका उचित हक मिलना चाहिए।
भाजपा के भगवत कराड ने सरकार ने पिछले 10 साल में गरीब, युवा, किसान सहित विभिन्न वर्गों के लिए कई काम किए हैं। उन्होंने डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) को सरकार की एक प्रमुख उपलब्धि बताया और कहा कि इससे सरकारी योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि बजट बिना सोचे-समझे और विशेषज्ञों से परामर्श किए बिना तैयार किया गया और यही कारण है कि सरकार को पूंजीगत लाभ कर के संबंध में संशोधन लाना पड़ा।
उन्होंने जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी हटाने की मांग की। उन्होंने टोल टैक्स को लेकर भी चिंता जतायी और कहा कि यह आम आदमी के लिए बड़ी समस्या बन गयी है।
चर्चा में भाग लेते हुए बीजद की सुलता देव ने कहा कि यह ‘‘कुर्सी बचाओ’’ बजट है जिसमें ओडिशा के लिए कुछ नहीं है। पोलावरम परियोजना का विरोध करते हुए उन्होंने दावा किया कि इससे आदिवासियों के कई गांव प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि यह सरकार आदिवासी कार्ड खेल रही है।
भाषा अविनाश