रास में सरकार ने की चार राज्यों से ‘शिक्षा का अधिकार’ के प्रावधान लागू करने की अपील
मनीषा माधव
- 07 Aug 2024, 05:32 PM
- Updated: 05:32 PM
नई दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) केंद्र ने बुधवार को राज्य सरकारों से ‘शिक्षा का अधिकार’ कानून के प्रावधान लागू करने की अपील की, जिसके तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें अनिवार्य की गई हैं।
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने प्रश्नकाल के दौरान राज्यसभा को बताया कि पंजाब, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को सीटें आरक्षित करने के लिए इस कानून के प्रावधानों को लागू नहीं किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सदन में अपील करना चाहता हूं कि इस कानून के तहत किसी भी लाभार्थी को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।’’
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी के आरटीई पर पूछे गए पूरक प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची में आती है और केंद्र तथा राज्य दोनों का प्रयास सभी के लिए 12वीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा प्रदान करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘आजकल पहली कक्षा में लगभग 100 प्रतिशत नामांकन है, यह सभी राज्यों के सामूहिक प्रयासों के कारण है।’’
प्रधान ने कहा ‘‘लेकिन कक्षा आगे बढ़ने के साथ संख्या में गिरावट आती है। यह गिरावट संबंधित राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों पर निर्भर करती है। ’’
उन्होंने कहा कि यद्यपि शिक्षा समवर्ती सूची में आती है, लेकिन स्कूली शिक्षा का ध्यान मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा रखा जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरटीई और एनईपी (नयी शिक्षा नीति) दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। इन दोनों के माध्यम से यह सुनिश्चित करना हम सभी का कर्तव्य है कि सभी को 12वीं कक्षा तक शिक्षा मिले।’’
प्रधान ने आगे कहा कि पिछली सरकार द्वारा तैयार किए गए आरटीई में वंचित बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें लाने का अच्छा प्रावधान है। उन्होंने उन राज्य सरकारों से भी सहयोग करने की अपील की, जिन्होंने इस प्रावधान को लागू नहीं किया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘जब सभी प्रयास करेंगे, तभी हम इसे हासिल कर पाएंगे। हमने प्रवेश स्तर पर तो 100 प्रतिशत हासिल कर लिया है, लेकिन 12वीं कक्षा तक इसे हासिल करना अभी बाकी है।’’
इससे पहले, आम आदमी पार्टी (आप) के विक्रमजीत सिंह साहनी ने आरटीई के तहत आने वाले बच्चों की संख्या और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछा।
इस पर चौधरी ने कहा कि आरटीई कानून 2009 में पारित किया गया था और यह गरीब परिवार के बच्चों के लिए एक समावेशी योजना है, जो इस सरकार की प्राथमिकता भी है। इसमें औपचारिक शिक्षा प्रणाली से छूटे बच्चों को वापस लाने का भी प्रावधान है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटों के आरक्षण के प्रावधान को लागू नहीं किया है। उनके अनुसार, पंजाब सरकार ने 25 प्रतिशत कोटा लागू करने से इनकार करते हुए कहा है कि उनके पास पर्याप्त संख्या में सरकारी स्कूल हैं।
चौधरी ने कहा, ‘‘मैं सदन में अपील करना चाहता हूं कि इस कानून के तहत किसी भी लाभार्थी को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।’’
शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता साहनी ने उच्च शिक्षा में फीस विनियमन के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी जानना चाहा। उन्होंने शिक्षण संस्थानों द्वारा ली जाने वाली ऊंची फीस पर भी चिंता जताते हुए कहा कि उनके अनुमान के अनुसार एक अभिभावक को अपने बच्चे की ‘‘केजी से पीजी तक की शिक्षा पर 25 से 30 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं।’’
इस पर चौधरी ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची में आती है और राज्य सरकार की भूमिका तथा कर्तव्य अधिक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कई राज्यों ने फीस विनियमन की कोशिश की है और इसके लिए नीतियां बनाई हैं।’’
चौधरी ने कहा कि उच्च शिक्षा में, चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर, यूजीसी ने सभी धाराओं को विनियमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में निवेश में वृद्धि हुई है और केंद्र ने भी पिछले 10 वर्षों में इसे दोगुना कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 में शिक्षा बजट 68,000 करोड़ रुपये था और इस बजट में यह 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।’’
आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने निजी स्कूलों द्वारा विभिन्न मदों में लिए जाने वाले शुल्क का जिक्र करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल से ही ऊंची कीमतों पर यूनिफॉर्म, किताबें आदि खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र ने राज्य सरकारों को इसका ऑडिट करने और इस मुनाफाखोरी को रोकने के लिए कोई निर्देश दिया है।
इस पर प्रधान ने कहा कि यह राज्य का विषय है और उन्हें इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और सरकार इस कार्रवाई का समर्थन करेगी।
भाषा मनीषा