पश्चिम बंगाल की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी हे केंद्र सरकार ने : तृणमूल सांसद जवाहर सरकार
माधव मनीषा
- 07 Aug 2024, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने केंद्र सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव करने और प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल की आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है।
उच्च सदन में आम बजट से जुड़े विनियोग विधेयक और जम्मू कश्मीर के बजट से जुड़े विनियोग विधेयकों पर संयुक्त चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के 34 हजार करोड़ रूपये रोक रखे हैं। उन्होंने कहा कि यह धनराशि क्यों रोकी गयी, इसके बारे में वह निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकते किंतु ऐसा प्रतीत होता है कि यह प्रतिशोध की नीति के कारण किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की वर्तमान सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार की आर्थिक नाकेबंद कर रखी है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि भारत सरकार ने उपकर और अतिरिक्त शुल्क को अविभाज्य पूल में क्यों रखा है, इसे राज्यों को क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?
सरकार ने कहा कि केंद्र के संकेत समझ कर बैंक भी अलग अलग राज्यों में एक समान तरीके से ऋण नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संघवाद की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गयी क्योंकि ‘‘हम आपके साथ नहीं हैं।’’
तृणमूल सदस्य ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि 70 प्रतिशत पीएलआई केवल एक राज्य को गया है और वह राज्य है गुजरात। उन्होंने वित्त मंत्री को चुनौती दी कि वह उनके इस दावे को गलत साबित करके दिखायें।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पीएलआई से जुड़े सारे दस्तावेजों को सदन के पटल पर रखा जाए ताकि आम जनता को इसके बारे में जानकारी मिल सके।
तृणमूल कांग्रेस के ही मोहम्मद नदीमुल हक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आज डिजिटल युग में कर का नोटिस ईमेल या मैसेज के रूप में आ जाता है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि ऐसे नोटिस को केवल ऑफिस के समय और कामकाजी दिनों में ही भेजा जाए।
उन्होंने यह मांग भी की कि ऐसे नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए।
हक ने मांग की कि जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाले जीएसटी को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों पर जीएसटी लगाया जाना ‘पाप’ है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने कहा कि आज नागरिक सिर से लेकर पैर तक जिन चीजों का प्रयोग करता है, उन सब पर टैक्स लगता है। उन्होंने कहा कि आज बिजली नहीं आने पर यदि हमें जेनरेटर खरीदना पड़ता है तो सरकार उस पर भी जीएसटी लगा देती है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में विभिन्न समुदाय के सदस्यों की आरक्षण की बढ़ती मांग के बीच समाज में मतभेद बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए कटुता पैदा होती है और कानून एवं व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने का खतरा है।
खान ने सुझाव दिया कि संसद में कानून बनाकर आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाया जाए। उन्होंने मांग की कि देश में जाति जनगणना करायी जानी चाहिए जो विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (‘इंडिया’) की भी एक प्रमुख मांग है।
चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के अरुण सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास तथा किसान कल्याण पर सबसे अधिक जोर दिया है तथा गरीबों के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सूचकांक के आधार पर देखा जाये तो पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की तुलना में देश की स्थिति बहुत अच्छी हो गयी है। उन्होंने कहा कि आज कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारत के आर्थिक विकास की सराहना कर रही हैं।
सिंह ने कहा कि सरकार रेलवे सहित विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं को तेज गति से क्रियान्वित कर रही है। सरकार आने वाले समय में रेलवे में शून्य दुर्घटना के लक्ष्य के लिए काम कर रही है।
भाजपा के घनश्याम तिवाड़ी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारत को 2047 को आत्मनिर्भर एवं विकसित बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसके लिए वित्त विधेयक में आधारशिला रखी गयी है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था किंतु गरीबी तो हटी नहीं, गरीब हट गये। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि इसके कारण अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारत की सराहना करती हैं।
तिवाड़ी ने कहा कि आज विपक्ष सेना को बदनाम करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे कांग्रेस सदस्यों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत चीन युद्ध के बाद कांग्रेस सरकार ने सेना में शार्ट सर्विस कमीशन के आधार पर अधिकारियों की भर्ती की योजना शुरू की थी।
उन्होंने कहा कि आज भारत की सेना के हाथ खुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत के पड़ोस और यूरोप के विभिन्न देशों के हालात देखें तो भारत की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है।
तिवाड़ी ने जाति जनगणना की विपक्ष की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार ने जाति जनगणना करायी थी किंतु उस सरकार ने जातियों की गणना के परिणाम क्यों नहीं घोषित किए?
भाषा
माधव