महंगाई की मार से बेहाल मध्यम वर्ग कर दे रहा, जबकि कॉरपोरेट कंपनियों को छूट दी जा रही : तृणमूल
मनीषा माधव
- 07 Aug 2024, 05:26 PM
- Updated: 05:26 PM
नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) वित्त वर्ष 2024-25 के लिए किये गये कर प्रावधान को मध्यम वर्ग के लिए नुकसानदायक और अमीरों एवं कॉरपोरेट घरानों के लिए लाभदायक बताते हुए तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि महंगाई की मार से बेहाल मध्यम वर्ग कर दे रहा है, जबकि कॉरपोरेट कंपनियों को छूट दी जा रही है।
उच्च सदन में विनियोग (संख्यांक दो) विधेयक 2024 और जम्मू कश्मीर विनियोग (संख्यांक तीन) विधेयक 2024 पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर से 18 प्रतिशत जीएसटी को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा ‘‘आप जीएसटी परिषद की आड़ नहीं ले सकते क्योंकि उसमें 18 राज्य हैं जिनमें से ज्यादातर में आपकी सरकार है। आप जीएसटी परिषद को बीच में मत लाइये। जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर से 18 प्रतिशत जीएसटी को हटाइये। ’’
उन्होंने कहा कि 2023-24 में स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी के रूप में 8,263 करोड़ रुपये एकत्र किए गए जबकि जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर से जीएसटी अविलंब हटा दिया जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल पर श्वेत पत्र लाने की मांग करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा में राज्य को एक रुपया भी नहीं दिया गया तथा आवास योजना की आवंटन राशि से भी राज्य को वंचित रखा गया है।
उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए किये गये कर प्रावधान को मध्यम वर्ग के लिए नुकसानदायक और अमीरों एवं कॉरपोरेट घरानों के लिए लाभदायक बताया। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को ‘युक्तिपूर्ण’ बनाने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में संतुलन जरूरी है, लेकिन बजट में यह संतुलन कहीं नहीं है।
उन्होंने कॉरपोरेट कर में की गयी कटौती को गलत बताते हुए कहा कि महंगाई की मार से बेहाल मध्यम वर्ग कर दे रहा है, जबकि कॉरपोरेट कंपनियों को छूट दी जा रही है।
ओब्रायन ने मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के तहत कृषि उपकरणों एवं संबंधित चीजों पर कर लगाने को प्रतिगामी फैसला करार देते हुए कहा कि इसे खत्म किया जाना चाहिए।
इससे पहले, जब उच्च सदन की बैठक भोजनावकाश के बाद शुरु हुई तो डेरेक ओब्रायन ने कहा कि विनियोग (संख्यांक दो) विधेयक 2024 और जम्मू कश्मीर विनियोग (संख्यांक तीन) विधेयक 2024 पर सदन में चर्चा होनी है लेकिन ‘‘देश की वित्त मंत्री कहां हैं?’’
उन्होंने दोनों विधेयकों पर चर्चा के लिए सदन में वित्त मंत्री के मौजूद न होने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पूरे देश के बजट को लेकर है और वित्त मंत्री को यहां होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री उपस्थित नहीं हैं अत: सदन की बैठक स्थगित कर देना चाहिए।
कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि वित्त राज्य मंत्री तक सदन में उपस्थित नहीं हैं।
सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि संविधान में स्पष्ट कहा गया है कि मंत्रिपरिषद जवाबदेह है और सदन में विदेश मंत्री (एस जयशंकर) मौजूद हैं।
इसी दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सदन में आ गईं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय में एक ही वित्त राज्य मंत्री हैं जो लोकसभा में हैं जहां विनियोग विधेयक पर चर्चा हो रही है और शायद आज जवाब भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय में अगर दूसरे वित्त राज्य मंत्री होते तो वह यहां होते लेकिन एक ही वित्त राज्य मंत्री हैं।
भाषा
मनीषा