अदालत ने खुले नालों और सड़क पर कचरे को लेकर वरिष्ठ एमसीडी अधिकारियों को फटकार लगाई
नोमान अविनाश
- 06 Aug 2024, 10:43 PM
- Updated: 10:43 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर के गाजीपुर इलाके में सड़कों पर फैले कूड़े और खुले नालों को लेकर एमसीडी को फटकार लगाते हुए मंगलवार को कहा कि नगर निगम प्रशासन एक 'क्लब' बन गया है, जिसके वरिष्ठ अधिकारियों में काम नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं है।
गाजीपुर में एक मां-बेटे की जलभराव के कारण नाले में गिरने से मौत हो गई थी। अदालत ने उस मामले में यह टिप्पणी की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी देते हुए कहा कि उस स्थान की तस्वीरें चौंकाने वाली हैं, जहां सड़क पर वर्षों नहीं तो महीनों से कूड़ा पड़ा हुआ है। पीठ ने कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को “भंग” कर दिया जाना चाहिए क्योंकि इससे “किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो रही है।”
पीठ ने कहा, “वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। इन तस्वीरों को देखिए। दिल्ली जैसी जगह में हालात चौंकाने वाले हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि हमारे यहां डेंगू, चिकनगुनिया है।”
पीठ में न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला भी शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों को क्षेत्र में खुले नालों को बंद कर देना चाहिए या उन पर बैरिकेड लगा देना चाहिए था।
अदालत ने टिप्पणी की, “यह बिना बैरिकेड के कैसे हो सकता है? आपको लगता है कि लोग पानी पर चलेंगे? केवल एमसीडी अधिकारियों को ही यह सौभाग्य प्राप्त है कि वे पानी पर चल सकते हैं।”
अदालत ने कहा, “वहां कितना कचरा और मलबा पड़ा है। आपने (पिछले साल) सड़क का अधिग्रहण कर लिया। आपने सड़क के इस हिस्से पर क्या किया है? आज आपका विभाग सोचता है कि काम करना अपराध है... हम वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करना शुरू करेंगे।”
अदालत ने एमसीडी की स्थायी समिति न होने और अगली कैबिनेट बैठक के लिए कोई तारीख निर्धारित नहीं किए जाने के संबंध में भी चिंता जताई।
इसने डीडीए को निर्देश दिया कि वह खुले नालों पर बैरिकेड लगाए तथा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करे। इस क्षेत्र में नाले का एक हिस्सा डीडीए के पास भी है।
डीडीए और एमसीडी दोनों के वकीलों ने कहा कि यह घटना उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र में नहीं हुई है, इस पर अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विचार नहीं कर रही है और पुलिस से अपनी जांच शीघ्र पूरी करने को कहा।
अदालत ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि इसमें “आपराधिक लापरवाही” हुई है। उसने जांच अधिकारी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।
उपायुक्त ने अदालत को बताया कि नालों को ढका जा रहा है और नगर निगम क्षेत्र की सफाई कर रहा है, लेकिन सीमा के निकट होने के कारण उत्तर प्रदेश की ओर से काफी मात्रा में कचरा आ रहा है।
अदालत ने अधिकारी द्वारा सुधारात्मक उपाय का आश्वासन देने के बजाय "बहस" करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि स्थिति इससे अधिक खराब नहीं हो सकती।
अदालत मयूर विहार फेज 3 निवासी झुन्नू लाल श्रीवास्तव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें महिला और उसके तीन साल के बेटे की मौत के मामले में कथित लापरवाही के लिए ठेकेदार और डीडीए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
भाषा
नोमान