हथियार बरामदगी मामला: उच्च न्यायालय ने अपर्याप्त साक्ष्य का हवाला देते हुए पांच आरोपियों को जमानत दी
नोमान अमित
- 06 Aug 2024, 08:51 PM
- Updated: 08:51 PM
मुंबई, छह अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने 2017 में पुणे में ‘सनबर्न’ महोत्सव पर हमले की साजिश रचने के आरोप में एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को जमानत दे दी और कहा कि आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के मौलिक अधिकार के रूप में शीघ्र सुनवाई को मान्यता दी गई है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने 30 जुलाई के आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य साजिश के आरोपों को साबित करने के लिए अपर्याप्त हैं और आरोपी लंबे समय से कैद हैं और मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना कम है।
महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) ने 2018 में नालासोपारा में दो अन्य संदिग्धों के आवास से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक का जखीरा जब्त किया था जिसके बाद पांच आरोपियों, सुजीत रंगास्वामी, अमित बद्दी, गणेश मिस्किन, श्रीकांत पंगारकर और भरत कुराने को 2018 में गिरफ्तार किया गया था।
पांचों आरोपी 2018 से हिरासत में हैं और मुकदमा लंबा चलने की उम्मीद है, क्योंकि अभियोजन पक्ष की सूची में 417 गवाह हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘सुनवाई समय से पूरी होने की संभावना कम है। आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के मौलिक अधिकार के रूप में शीघ्र सुनवाई को मान्यता दी गई है।’’
एटीएस ने दावा किया था कि हथियारों और गोला-बारूद का यह जखीरा दिसंबर 2017 में ‘सनबर्न’ संगीत महोत्सव पर हमला करने के लिए था।
एटीएस का आरोप है कि आरोपी दक्षिणपंथी समूह ‘सनातन संस्था’ और ‘हिंदू जनजागृति समिति’ के सक्रिय सदस्य हैं और वे ‘हिंदू राष्ट्र’ के निर्माण के दर्शन से प्रभावित हैं।
उच्च न्यायालय विशेष अदालत द्वारा जमानत देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देने वाली आरोपियों की अपील पर सुनवाई कर रहा था। पीठ ने कहा कि किसी हमले को अंजाम नहीं दिया गया।
पीठ ने कहा, ‘‘सनबर्न कार्यक्रम वास्तव में बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ, लेकिन मौजूदा मामले में गिरफ्तारी, कार्यक्रम समाप्त होने के आठ महीने बाद अगस्त 2018 के पहले सप्ताह में की गई थी।’’
अदालत ने कहा, ‘‘हमने प्रथम दृष्टया यह राय बनाई है कि ये बयान हमारे समक्ष अपीलकर्ताओं के खिलाफ साजिश के आरोप को साबित करने के लिए अपर्याप्त हैं।’’
पीठ ने सभी पांचों आरोपियों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी और उन्हें हर महीने एक बार एटीएस के मुंबई कार्यालय और हर सुनवाई के लिए अधीनस्थ अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने समाज में हिंदू विरोधी तत्वों का विरोध करने के लिए एक गिरोह बनाया था और 2017 में पुणे में आयोजित हुए ‘सनबर्न’ महोत्सव सहित कुछ संगीत समारोहों और कार्यक्रमों को निशाना बनाने की साजिश रची थी।
आरोप है कि आरोपियों ने पत्थर और पेट्रोल बम फेंककर तथा आग्नेयास्त्रों का प्रयोग करके उत्पात मचाकर महोत्सव को बाधित करने की साजिश रची थी।
आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
भाषा नोमान