नवीकरणीय ऊर्जा सरकार की शीर्ष प्राथमिकता: प्रह्लाद जोशी
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र अविनाश
- 06 Aug 2024, 08:00 PM
- Updated: 08:00 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के देश के लक्ष्य को 30 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश से पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक है और यह इस तथ्य से साबित होता है कि इस साल बजट में परिव्यय को दोगुना कर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने अपने मंत्रालय के कामकाज पर उच्च सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘‘भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के निवेश की गतिशीलता में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा है। पिछले 10 वर्षों में लगभग 7 लाख करोड़ रुपये पहले ही निवेश किए जा चुके हैं।’’
उन्होंने कहा कि गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित 5,00,000 मेगावाट क्षमता स्थापित करने के लिये 30 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है।
उनके एक घंटे से अधिक लंबे जवाब के दौरान विपक्ष ने चीन के साथ संबंधों को लेकर कांग्रेस पार्टी पर उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच 10 साल में तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश भी नहीं आया।
उन्होंने कहा, ‘‘2004 और 2014 के बीच, जब पूरी दुनिया नवीकरणीय ऊर्जा पर चर्चा कर रही थी और विकसित कर रही थी, कुल व्यय केवल 6,091 करोड़ रुपये था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस वर्ष (उनके मंत्रालय के लिए) का बजट 21,000 करोड़ रुपये से अधिक है।’’
जोशी ने कहा, पिछले 10 वर्षों में ‘कुल खर्च 36,952 करोड़ रुपये है’।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, पीएम सूर्य घर, पीएम कुसुम, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, व्यवहार्यता गैप फंडिंग (वीजीएफ), और सौर मॉड्यूल के लिए पीएलआई जैसी योजनाएं भी शुरु की गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सब मिलाकर 1.60 लाख करोड़ रुपये के करीब होगा।’’
कांग्रेस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन काल के दौरान तो 1.60 लाख करोड़ रुपये तक के घोटाले हो जाते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार पंचमृत प्रतिबद्धताओं पर काम कर रही है, जिसमें उसने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।’’
चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने संदेह जताया और पूछा कि सरकार 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को कैसे हासिल कर पाएगी जबकि वर्तमान क्षमता केवल 200 गीगावाट की है।
इसका जवाब देते हुए जोशी ने सदस्यों से सरकार पर भरोसा रखने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे 200 गीगावॉट तक ले गए हैं और 500 गीगावॉट के लक्ष्य को भी हासिल करेंगे।’’
उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत में उत्पादित कुल नवीकरणीय ऊर्जा 193.5 अरब यूनिट से बढ़कर 359.89 अरब यूनिट हो गई है।
जोशी ने कहा, ‘‘अब भारत स्थापित क्षमता के मामले में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है।’’
उन्होंने कहा कि भारत पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर और सौर पीवी क्षमता में पांचवें स्थान पर है।
मंत्री ने कहा कि आज की तारीख में सौर ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता 85.4 गीगावॉट है और 74.34 गीगावॉट और 104 गीगावॉट क्षमता की नवीनतम निविदा कार्यान्वयन के अधीन है।
कांग्रेस सदस्य रंजीत रंजन की टिप्पणी 'मोदी चीनी भाई भाई' के जवाब में जोशी ने कहा कि यह टिप्पणी एक राजनीतिक दल के सदस्य की ओर से आई है जिसने अपनी पार्टी को चलाने के लिए चीन से चंदा लिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘...जमीन हमने 1962 में खो दी। उन्होंने कहा मोदी चीनी भाई भाई। वे लोग हैं। जिस पार्टी ने अपनी पार्टी चलाने के लिए चीन से चंदा लिया है, वह हमें उपदेश देती है। जब वे विपक्ष में थे, तो वे गुप्त रूप से किससे मिले? चीनी राजदूत।’’
रंजन ने कहा था कि अक्षय ऊर्जा क्षेत्र चीन से आयात पर निर्भर है।
जोशी ने कहा कि (विपक्षी) सदस्यों ने वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा में चौथे और नवीकरणीय ऊर्जा में पांचवें स्थान पर देश के प्रदर्शन को स्वीकार नहीं किया।
विपक्ष ने जोशी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और उपसभापति हरिवंश से आग्रह किया कि वह मंत्री को उनकी टिप्पणी को प्रमाणित करने के लिए कहें।
इसके बाद विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए लेकिन जोशी ने उन पर हमला जारी रखा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्य तथ्यों के बिना आरोप लगाते हैं और उनमें जवाब सुनने का धैर्य नहीं है।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र