सीबीआई ने पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करने में भ्रष्टाचार को लेकर हिंडाल्को पर मुकदमा दर्ज किया
राजकुमार पवनेश
- 06 Aug 2024, 07:31 PM
- Updated: 07:31 PM
नई दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने आदित्य बिड़ला समूह से जुड़ी और देश की अग्रणी एल्यूमीनियम उत्पादक कंपनी हिंडाल्को पर 2011 और 2013 के बीच कोयला खनन के सिलसिले में पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करने में कथित भ्रष्टाचार को लेकर मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की तत्कालीन निदेशक टी चांदिनी को भी नामजद किया है, जिन पर मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए ओडिशा के झारसुगुड़ा के अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र में तालाबीरा-। खदान में खनन की अनुमति देने में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की सदस्य सचिव के रूप में कंपनी का पक्ष लेने का आरोप है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने करीब आठ सालों तक प्राथमिक जांच करने के बाद हिंडाल्को एवं चांदिनी के खिलाफ भादंसं की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की।
प्राथमिकी दर्ज किये जाने पर हिंडाल्को के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ यह 2014-15 से जुड़ा पुराना मामला है। सरकार की आवंटन निरसन प्रक्रिया के तहत इन खदानों का आवंटन रद्द किया गया था। यह सार्वजनिक रिकॉर्ड का मामला है, जहां 100 से ज़्यादा खदानों का आवंटन रद्द किया गया था।’’
केंद्रीय अन्वषेण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2016 में इन आरोपों को लेकर प्रारंभिक जांच दर्ज की थी कि ‘आदित्य बिड़ला मैनेजमेंट कोरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड (एबीएमसीपीएल)’ ने तालाबीरा से कोयला खनन के वास्ते अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने के लिए मंत्रालय के अधिकारियों को 2011 और 2013 के बीच कथित तौर पर ‘भारी रिश्वत’ दी थी।
जांच से पता चला कि मंत्रालय ने 2006 में किसी भी कंपनी के लिए सभी नई परियोजनाओं, मौजूदा उत्पादों के विस्तार और मौजूदा विनिर्माण इकाई में उत्पाद मिश्रण में किसी भी बदलाव के लिए पर्यावरण मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया था।
जिन परियोजनाओं को पूर्व पर्यावरणीय मंज़ूरी की आवश्यकता थी, उन्हें ईएसी से गुजरना होता था, जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शामिल थे। ईएसी की अनुशंसा के आधार पर ही नियामक प्राधिकरण द्वारा मंज़ूरी दी जाती थी।
हिंडाल्को को तालाबीरा-I खदान से प्रति वर्ष 0.4 मिलियन टन (एमटीपीए) कोयला खनन के लिए 2001 में उसकी पहली पर्यावरणीय मंज़ूरी मिली थी। जनवरी 2009 में इसके विस्तार के लिए एक और मंज़ूरी दी गई, जिससे खनन को 0.4 एमटीपीए से बढ़ाकर 1.5 एमटीएपी करने की अनुमति मिल गई।
दूसरी मंजूरी के करीब महीने भर बाद ही कंपनी ने अपनी क्षमता दोगुणा कर तीन एमटीपीए करने की मांग की जिसपर ईएसी द्वारा विचार किया जाना था।
प्राथमिकी में कहा गया है कि जांच में सामने आया कि मंत्रालय से जितनी मात्रा में कोयला खनन की अनुमति मिली थी, कंपनी ने उससे अधिक कोयला निकालकर 2001 एवं 2009 में मिली मंजूरियों का कथित रूप से उल्लंघन किया था।
प्राथमिकी में कहा गया है कि कंपनी ने 2004-05 और 2007-08 के बीच तथा 2008-09 के दौरान कथित रूप से 3.04 एमटीपीए अतिरिक्त कोयला निकाला।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, ‘‘ ईएसी द्वारा जब विचार किया जा रहा था, तब यह तथ्य उसकी जानकारी में आया था और निदेशक टी चांदिनी उसकी सदस्य सचिव थीं।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बात की पुष्टि की कि तालाबीरा खदान झारसुगुडा के बहुत ही प्रदूषित क्षेत्र में था।
भाषा राजकुमार