प.बंगाल में स्वास्थ्य केद्रों के रंग निर्धारण मानकों को लेकर रास में नड्डा और डेरेक के बीच नोकझोंक
मनीषा माधव
- 06 Aug 2024, 05:10 PM
- Updated: 05:10 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के लिए रंग निर्धारण संबंधी दिशानिर्देशों और पश्चिम बंगाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत धन जारी करने के मुद्दे पर मंगलवार को राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा तथा तृणमूल कांग्रेस के सदस्य डेरेक ओ ब्रायन के बीच नोकझोंक हो गई।
नड्डा तृणमूल कांग्रेसके सदस्य साकेत गोखले द्वारा राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए एक पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। गोखले ने पूछा कि क्या यह सच है कि केंद्र सरकार ने रंग निर्धारण संबंधी निर्देश का पालन नहीं करने के ‘‘मामूली से कारण’’ को लेकर एनएचएम के तहत पश्चिम बंगाल को दी जाने वाली 828 करोड़ रुपये की धनराशि रोक दी गई है? उन्होंने मंत्री से ‘हां या ना’ में यह बताने का अनुरोध किया । उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बकाया राशि कब जारी की जाएगी ?
इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री नड्डा ने कहा, ‘‘यदि आप दिशानिर्देशों का पालन करते हैं, तो हां। यदि आप दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो नहीं।’’
नड्डा के जवाब के बाद तृणमूल सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा ‘‘मैं यहाँ किसी तर्क-वितर्क में शामिल होने नहीं आया हूँ। मेरे सहयोगी (गोखले) ने जो सरल बात कही थी, वह यह थी कि हाँ, हम हमेशा इसका अनुपालन करेंगे। लेकिन हमारा कहना यह था कि जब लोग स्वास्थ्य लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, तो रंग निर्धारण वाली किसी भी योजना का अनुपालन करना थोड़ा अतिशयोक्तिपूर्ण है। किसी रंग के लिए नहीं बल्कि हम इसे इस भावना के साथ लेंगे कि यह किसी और चीज़ के लिए हो। सिर्फ़ इसलिए कि यह आपका पसंदीदा रंग नहीं है, लोगों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।’’
इस पर नड्डा ने कहा, ‘‘पहला सवाल काले और सफेद रंग में था, इसलिए जवाब भी काले और सफेद रंग में ही था। अब सवाल मेरे प्रिय मित्र डेरेक ओ'ब्रायन की ओर से आया है और उनके बाल सफेद हैं। इसलिए जवाब भी सफेद रंग में ही होगा, जिसमें कुछ सकारात्मकता भी है।’’
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के लिए रंग निर्धारण की शर्तों को हटाने और बंगाल को एनएचएम कोष जारी करने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था।
प्रधानमंत्री को लिखे अपने दो पन्नों के पत्र में उन्होंने कहा था कि केंद्र द्वारा कोष रोके जाने से गरीब लोग अपने स्वास्थ्य लाभ से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने लिखा, ‘‘यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ... हाल ही में मुझे सूचित किया गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के लिए रंग निर्धारण दिशा-निर्देशों का पालन न करने के कारण पश्चिम बंगाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कोष जारी करने से रोक दिया है, जबकि अन्य शर्तें पूरी की गई थीं।’’
बनर्जी ने कहा कि वर्तमान में राज्य में लगभग 11,000 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र हैं जो प्रतिदिन तीन लाख से अधिक लोगों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि इमारतों का निर्माण 2011 में जब टीएमसी के सत्ता में आने के बाद से राज्य में रंग निर्धारण के अनुसार किया गया है।
बंगाल में सरकारी इमारतों को ज्यादातर नीले और सफेद रंग से रंगा जाता है।
भाषा
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