नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रयासों से रोजगार सृजन होंगे, प्रदूषण घटेगा : भाजपा
मनीषा माधव
- 06 Aug 2024, 04:58 PM
- Updated: 04:58 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों से रोजगार सृजन होने तथा प्रदूषण घटने का दावा करते हुए राज्यसभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष ने कहा कि सरकार की कड़ी मेहनत के चलते देश अपने लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर लेता है। वहीं विपक्ष ने सौर पैनलों का स्वदेश में उत्पादन करने तथा सिलिकॉन पर रिसर्च को बढ़ावा देने की मांग की ताकि सौर ऊर्जा का उत्पादन किफायती हो सके।
उच्च सदन में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के डॉ अनिल सुखदेवराव बोंडे ने कहा ‘‘देश को आगे बढ़ना है तो सबको साथ में चलना होगा। केवल आलोचना करने से कुछ नहीं होगा। देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना चाहिए और कार्बन उत्सर्जन शून्य होना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के चलते पर्यावरण को नुकसान हो रहा है जिसे देखते हुए नवीन ओर नवीकरणीय ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए ऊर्जा की बड़ी खपत होगी और इसके लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि बीते दस साल में गैर विद्युत ऊर्जा की क्षमता देश में दोगुनी हो चुकी है। ‘‘2014 की तुलना में सौर ऊर्जा क्षमता 30 गुना बढ़ी है।’’
इसी पार्टी के दीपक प्रकाश ने कहा ‘‘भारत नवीन ओर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक अगुवा के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि 2021 में ग्लासगो हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी26) में भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट स्थापित क्षमता का तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से 50 प्रतिशत संचयी विद्युत स्थापित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य की दिशा में भारत पूरे समर्पण और तत्परता के साथ आगे बढ़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है कि दुनिया प्रदूषण मुक्त बने और हाइड्रोजन मिशन इसी संकल्प को सच करेगा। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य रखा है।
भाजपा के ही बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने कहा कि भारत की स्थापित गैर जीवाश्म ईंधन क्षमता बीते साढ़े आठ साल में 400 फीसदी तक बढ़ी है और 203 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता दस साल में 28 फीसदी बढ़ी और यह बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा ‘‘पवन ऊर्जा की 2014 में स्थापित कुल क्षमता 21000 मेगावाट थी जो 2024 में 47000 मेगावाट हो गई। सौर ऊर्जा की स्थापित कुल क्षमता 2014 में 2821 मेगावाट थी जो 2024 में बढ़ कर 83000 मेगावाट हो गई। कचरे से बिजली उत्पादन क्षमता 2014 में 140 मेगावाट थी जो 2024 में 343 मेगावाट हो गई।’’
इसी पार्टी की संगीता यादव ने कहा कि पिछले कुछ साल से भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व लगातार बढ़ता गया है और 1.4 अरब लोगों के देश में, अगर पर्यावरण अनुकूल मॉडल नहीं अपनाया जाता है, तो भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा की तलाश में जल विद्युत से सौर और पवन ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा ‘‘सरकार ने जो भी लक्ष्य तय किया उसे समय से पहले पूरा किया है। 20 फीसदी इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने का लक्ष्य तो पांच महीने पहले ही पूरा कर लिया गया है।’’
बहुजन समाजवादी पार्टी के रामजी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण आज प्रदूषण सहित कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिनका निदान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा से हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा तो जरूरी है किंतु यह अभी भी देश में महंगी है। उन्होंने कहा कि एक किलोवाट सौर ऊर्जा तैयार करने में एक लाख रुपये का खर्च आता है और 12 प्रतिशत जीएसटी भी लगता है जबकि भारत के अंदर सिलिकॉन की कमी नहीं है।
उन्होंने कहा ‘‘तटीय क्षेत्र में सिलिकॉन भरपूर उपलब्ध है। इस पर रिसर्च किया जाना चाहिए। यह जरूरी है।’’
रामजी ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र मे कुछ कंपनियों का एकछत्र राज बना हुआ है जिसे खत्म किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा ‘‘आज भी 57 फीसदी सौर पैनल चीन से आते हैं। इनकी गुणवत्ता स्तरीय नहीं है। हमें देश में ही स्तरीय सौर पैनल बनाने होंगे। इसके लिए विशेषज्ञता हासिल करनी होगी। ऐसा करने पर इनकी लागत और कीमत कम हो सकेगी।’’
उन्होंने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में और काम करने की जरूरत रेखांकित की।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा ‘‘सौर ऊर्जा बहुत काम की है। इसमें ग्रिड फेल होने की आशंका नहीं होती। लेकिन असली समस्या पैनलों की होती है जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं होती।’’
उन्होंने कहा ‘‘स्कूलों, किसानों के लिए सौर पैनलों में जो रियायत दी जाती है उसके लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं और इसमें समय भी लगता है। इससे बचने के लिए लोग निजी कंपनियों का रुख करते हैं। इस ओर ध्यान देना चाहिए।’’
सपा नेता ने कहा कि किसानों की फसल की सिंचाई अगर समय पर न हो पाए तो उनकी फसल खराब हो जाएगी। ‘‘सरकार को देखना चाहिए कि रियायतों के लिए औपचारिकताएं पूरी करने में लगने वाला समय कम करने के लिए और क्या उपाय किए जा सकते हैं।
यादव ने कहा ‘‘एक बात मैं माफी के साथ कहना चाहता हूं कि सत्ता पक्ष की ओर से दिए गए भाषणों में अतिरंजना और अतिशयोक्ति होती है। इसे व्यावहारिक होना चाहिए।’’
भाषा मनीषा