केंद्र पश्चिमी घाट के संवेदनशील क्षेत्रों को संभवत: राज्य-दर-राज्य आधार पर करेगा अधिसूचित
सिम्मी माधव
- 06 Aug 2024, 12:42 PM
- Updated: 12:42 PM
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को राज्य-दर-राज्य आधार पर अधिसूचित कर सकती है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि पूरे क्षेत्र को एक बार में पारिस्थितिकी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) घोषित करना संभव नहीं होगा, इसलिए सरकार यह क्रमिक दृष्टिकोण अपना सकती है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के 56,825.7 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील घोषित करने के लिए मार्च 2014 से लेकर अब तक छह मसौदा अधिसूचनाएं जारी की हैं किंतु राज्यों की आपत्तियों के कारण अंतिम अधिसूचना अब भी लंबित है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि पूर्व वन महानिदेशक संजय कुमार की अध्यक्षता में अप्रैल 2022 में गठित एक विशेषज्ञ समिति समाधान खोजने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि हितधारकों से चर्चा के बाद समिति ने महसूस किया कि पूरे क्षेत्र को एक साथ ईएसए घोषित करना संभव नहीं है और अगर धीरे-धीरे राज्य दर राज्य ऐसा किया जाए तो यह अधिक प्रभावी होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर घनी मानव बस्तियां विकसित हो गई हैं, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति संवेदनशील हो गई है, इसलिए केंद्र, राज्यों के साथ परामर्श जारी रखेगा और उन क्षेत्रों को अधिसूचित करेगा जहां आम सहमति बन गई है।
ताजा अधिसूचना 31 जुलाई को जारी की गई थी, जिसके एक दिन पहले वायनाड में भूस्खलन की घटनाओं में 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। राज्य और अन्य जगहों के वैज्ञानिकों ने इस आपदा के लिए वन क्षेत्र में कमी होना, पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में खनन और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया है।
मसौदा अधिसूचना में केरल के 9,993.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव है, जिसमें भूस्खलन प्रभावित जिले के दो तालुका के 13 गांव शामिल हैं।
इन 13 गांवों में मनंथावाडी तालुका में पेरिया, थिरुनेली, थोंडरनाड, त्रिसिलेरी, किदांगनाड और नूलपुझा और विथिरी तालुका में अचूरनम चुंडेल, कोट्टापडी, कुन्नाथिदावका, पोझुथाना, थारियोड और वेल्लारीमाला शामिल हैं।
हालिया भूस्खलन में विथिरी तालुका के मुंडक्कई, चूरलमाला और अट्टामाला गांव प्रभावित हुए, जिन्हें मसौदा अधिसूचनाओं में शामिल नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर, अधिसूचना में 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील घोषित करने का प्रस्ताव है, जिसमें गुजरात में 449 वर्ग किलोमीटर, महाराष्ट्र में 17,340 वर्ग किलोमीटर, गोवा में 1,461 वर्ग किलोमीटर, कर्नाटक में 20,668 वर्ग किलोमीटर, तमिलनाडु में 6,914 वर्ग किलोमीटर और केरल में 9,993.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है।
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