एआईकेएस ने प्रदर्शनकारी किसानों को 'विघटनकारी ताकतें' कहने के लिए आरएसएस की आलोचना की
अमित माधव
- 18 Mar 2024, 09:44 PM
- Updated: 09:44 PM
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) आल इंडिया किसान सभा ने पंजाब और हरियाणा के प्रदर्शनकारी किसानों को "विघटनकारी ताकतें" कहने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सोमवार को आलोचना की और दावा किया कि "हिंदुत्व आतंकवाद" देश के लिए सबसे गंभीर आंतरिक खतरा है।
एआईकेएस ने नागपुर में आरएसएस की हाल ही में संपन्न अखिल भारतीय बैठक का उल्लेख करते हुए यह टिप्पणी की। उक्त बैठक में आरएसएस के नेताओं ने आरोप लगाया था कि लोकसभा चुनाव से पहले, ‘‘किसान आंदोलन के बहाने अराजकता फैलाने का प्रयास फिर से शुरू किया गया है’’ और इसके जरिये पंजाब में "अलगाववादी आतंकवाद" ने अपना "बदसूरत सिर" उठाया है।
आरोपों का जवाब देते हुए, एआईकेएस ने एक बयान में कहा, ‘‘नागपुर में हाल ही में संपन्न राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में, इसके महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने पंजाब और हरियाणा में जारी किसानों के विरोध प्रदर्शन को उन्हें राष्ट्रविरोधी बताकर बदनाम किया है।
एआईकेएस ने आरएसएस नेता के बयान की निंदा की और कहा, "स्वतंत्रता संग्राम के गद्दारों द्वारा फैलाया गया यह झूठ एसकेएम के नेतृत्व वाले किसानों के निरंतर एकजुट आंदोलन के खिलाफ प्रतिशोध है, जिसने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को अपना कॉर्पोरेट समर्थक कृषि अधिनियम को वापस लेने के लिए मजबूर किया था।’’
एआईकेएस ने कहा कि किसान आंदोलन और पंजाब आंदोलन पर होसबाले की टिप्पणी "ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ सहयोग करने और भगत सिंह जैसे साम्राज्यवाद-विरोधी महान शहीद को बदनाम करने के आरएसएस के रुख का एक सिलसिला है।’’
उसने कहा, ‘‘जब पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी की निंदा करते हुए सड़कों पर था, तब आरएसएस और अन्य हिंदुत्व संगठन उनकी निंदा करने में व्यस्त थे।’’
उसने कहा, ‘‘आरएसएस नाम का भी एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं दे सका, उसने इन क्रांतिकारियों के महान बलिदान को ‘विफलता’ के रूप में कमतर करने का विकल्प चुना, गोलवलकर के 'बंच ऑफ थॉट्स' में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।"
वाम समर्थित किसान संगठन ने कहा, ‘‘आरएसएस ने पंजाब और हरियाणा के देशभक्त किसानों का वर्णय करने के लिए 'विघटनकारी ताकत' शब्द का इस्तेमाल किया है जो कृषि के कॉर्पोरेटीकरण के खिलाफ लड़ रहे हैं। वास्तविकता यह है कि वह हिंदुत्व आतंकवाद है जो देश की एकता और विविधता के लिए सबसे विघटनकारी आंतरिक खतरे के रूप में कार्य कर रहा है।’’
उसने कहा, ‘‘हिंदुत्व फासीवादी राजनीति अंतरराष्ट्रीय वित्तीय पूंजी और बड़े व्यवसाय के साथ गहराई से जुड़ी हुई है जो भारतीय किसानों को खतरे में डाल रही है। आरएसएस को साम्राज्यवादी ताकतों और सीआईए जैसी साम्राज्यवादी एजेंसियों के साथ मिलीभगत के अपने इतिहास को नहीं भूलना चाहिए।"
एआईकेएस ने दावा किया कि विभिन्न आधिकारिक जांच आयोग की रिपोर्ट में सांप्रदायिक दंगों को भड़काने में आरएसएस की "नापाक भूमिका" की पहचान की गई थी।
उसने कहा, ‘‘इसी कारण से 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद और 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।’’
उसने कहा, ‘‘1984 के सिख विरोधी नरसंहार के साथ-साथ 2002 के गुजरात नरसंहार में संघ परिवार के पदाधिकारियों द्वारा निभायी गई भूमिका अच्छी तरह से प्रलेखित है’’ और उसने सभी "देशभक्त ताकतों से आरएसएस के नेतृत्व वाले फासीवादी तत्वों को अलग-थलग करने और बेनकाब करने का आह्वान किया।’’
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वैचारिक संरक्षक आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को नागपुर में शुरू हुए संघ के वार्षिक 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' सम्मेलन में वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 पेश की गई थी। होसबाले द्वारा प्रस्तुत वार्षिक रिपोर्ट 2023-24 में कहा गया कि "पंजाब में अलगाववादी आतंकवाद ने फिर से अपना बदसूरत सिर उठाया है।"
आरएसएस ने किसान आंदोलन पर कहा, ''पंजाब में अलगाववादी आतंकवाद ने फिर से अपना बदसूरत सिर उठाया है। लोकसभा चुनाव से ठीक दो महीने पहले किसान आंदोलन के बहाने खासकर पंजाब में अराजकता फैलाने की कोशिशें फिर से शुरू कर दी गई हैं।’’
पिछले एक महीने से सैकड़ों किसान पंजाब-हरियाणा सीमा पर बैठे हुए हैं।
‘दिल्ली चलो’ मार्च उत्तर राज्यों पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा शुरू किए गए लगातार विरोध प्रदर्शन और सड़क नाकेबंदी का दूसरा दौर है।
भाषा अमित