कर्नाटक : कथित एमयूडीए घोटाले के खिलाफ भाजपा-जद(एस) की पदयात्रा जारी, कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
सिम्मी देवेंद्र
- 04 Aug 2024, 05:05 PM
- Updated: 05:05 PM
रामनगर (कर्नाटक), चार अगस्त (भाषा) कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी सहयोगी जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) ने कथित मैसुरु शहरी विकास प्राधिकरण स्थल (एमयूडीए) आवंटन घोटाले के खिलाफ रविवार को दूसरे दिन भी बेंगलुरु से मैसुरु तक सात दिवसीय मार्च जारी रखा और कांग्रेस सरकार एवं मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर निशाना साधा।
विपक्षी दलों का आरोप है कि एमयूडीए ने उन लोगों को मुआवजे के तौर पर भूखंड वितरित करने में अनियमितता बरती, जिनकी जमीन का ‘‘अधिग्रहण’’ किया गया है। मुआवजे के तौर पर भूखंड प्राप्त करने वालों में सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई ‘मैसुरु चलो’ पदयात्रा दूसरे दिन यहां बिदादी से शुरू हुई और यह 22 किलोमीटर की दूरी तय कर केंगल पहुंचेगी।
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं विधायक बी. वाई. विजयेंद्र, जद (एस) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, विधान परिषद में विपक्ष के नेता सी. नारायणस्वामी, जद (एस) नेता निखिल कुमारस्वामी, दोनों दलों के कई विधायक, नेता और कार्यकर्ता रविवार को बिदादी से शुरू हुए मार्च में शामिल हुए।
पदयात्रा के दौरान भाजपा और जद(एस) के झंडे और तख्तियां लिए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को सिद्धरमैया और उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारे लगाते देखा गया।
जिस मार्ग से मार्च गुजरा, उसके कई स्थानों पर दोनों दलों के झंडे, पताका और प्रमुख नेताओं की तस्वीरें लगाई गई थीं।
शनिवार को बेंगलुरु के निकट केंगेरी से शुरू हुए इस मार्च के पहले दिन बिदादी तक 16 किलोमीटर की दूरी तय की गई।
विजयेंद्र ने मार्च से पहले सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस, सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार विपक्ष के विरोध मार्च के बाद भयभीत हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मीडिया में देखा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री अब विपक्षी दलों से सवाल कर रहे हैं, क्योंकि हमने विरोध मार्च शुरू कर दिया है। यह शायद पहली बार है जब सत्तारूढ़ पार्टी विपक्ष से सवाल कर रही है। हम भ्रष्ट कांग्रेस सरकार के खिलाफ तथा अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़े वर्ग, गरीब एवं वंचित लोगों के पक्ष में अपनी आवाज उठा रहे हैं।’’
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस लोगों को लूट रही है। उन्होंने सिद्धरमैया और शिवकुमार पर ‘‘लूटे गए पैसे को गांधी परिवार’’ (सोनिया गांधी, राहुल गांधी) को देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम उनसे लूट को लेकर सवाल करते हैं, लेकिन वे (सरकार) जवाब देने से भाग रहे हैं। वे आज हमसे सवाल कर रहे हैं।’’
भाजपा-जद(एस) के मैसुरु तक पैदल मार्च के जवाब में कांग्रेस जनसभाएं कर रही है और दोनों दलों एवं केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है।
कुमारस्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि जिस दिन कांग्रेस राज्य में सत्ता में आई, उसने उसी दिन से अपनी ‘‘भ्रष्टाचार की दुकान’’ खोल ली।
उन्होंने कांग्रेस पर राज्य के लोगों के कल्याण के लिए इस्तेमाल होने वाले पैसे को लूटने का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘मंत्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा है, वे भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। हमने सरकार पर रिकॉर्ड के साथ आरोप लगाए हैं लेकिन वे बिना किसी दस्तावेज या सबूत के विपक्ष पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह 3.16 एकड़ जमीन जिसके बदले आपके (मुख्यमंत्री के) परिवार को 14 स्थल मिले, वह आपकी नहीं, बल्कि एमयूडीए की थी...सरकारी जमीन के लिए झूठे दस्तावेज बनाकर आपने 14 स्थल अपनी पत्नी के नाम करा लिए।’’
शिवकुमार ने शुक्रवार को विपक्ष के विरोध का जवाब देते हुए कुमारस्वामी और उनके परिवार की अचल संपत्तियों को लेकर निशाना साधा था और उन्हें इस बारे में स्पष्टीकरण देने की चुनौती दी थी।
इसके जवाब में कुमारस्वामी ने शिवकुमार की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘उपमुख्यमंत्री ने मेरी संपत्ति पर सवाल उठाया है। यह उतनी ही है जितनी 15 साल पहले थी। मैंने पंद्रह साल पहले फिल्म वितरक के रूप में कमाए गए पैसों से केथिगानाहल्ली में 45 एकड़ जमीन खरीदी थी। यह मेरे राजनीति में आने से पहले की बात है।’’
उन्होंने शिवकुमार पर ‘शांतिनगर हाउसिंग सोसाइटी’ घोटाले में कथित अनियमितताओं में शामिल होने तथा कई निर्दोष लोगों की जमीन जबरन हड़पने का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा कि अगर उन्होंने (कुमारस्वामी ने) कोई गलत काम किया होता तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में जिम्मेदारी नहीं दी होती।
ऐसा आरोप है कि पार्वती को मैसुरु के एक ‘पॉश’ इलाके में मुआवजे के तौर पर ऐसा भूखंड आवंटित किया गया, जिसका मूल्य उनकी उस जमीन की तुलना में अधिक था, जिसका एमयूडीए ने ‘‘अधिग्रहण’’ किया था।
एमयूडीए ने पार्वती को उनकी तीन एकड़ से अधिक क्षेत्रफल की जमीन के बदले में 50:50 अनुपात योजना के तहत भूखंड आवंटित किए थे। इस विवादास्पद योजना के तहत अधिग्रहीत अविकसित भूमि के बदले में भूमि देने वाले को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित करने की परिकल्पना की गई है।
भाषा
सिम्मी