उत्तर प्रदेश : पुलिस ने गिरफ्तार पत्रकार के खिलाफ दर्ज दो पुराने मामलों की जांच फिर शुरू की
सं आनन्द जितेंद्र
- 03 Aug 2024, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
कानपुर, तीन अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने कथित तौर पर जमीन हड़पने और जबरन वसूली के आरोप में हाल में गिरफ्तार किये गये एक स्थानीय पत्रकार के खिलाफ दर्ज दो पुराने मामलों की जांच फिर से शुरू कर दी। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, जिन मामलों को फिर से खोला गया है, वे 2021 और 2023 में कर्नलगंज और बाबूपुरवा थानों में दर्ज किए गए थे। इन मामलों में टीवी पत्रकार अवनीश दीक्षित और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। हालांकि, जांच के दौरान दीक्षित को ‘क्लीन चिट’ दे दी गई थी।
अपर पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) हरीश चंद्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “मामलों में शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचित किया कि शुरुआती जांच के दौरान आरोपियों ने उन्हें धमकाया था और उनकी नई शिकायत के आधार पर, तत्कालीन सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत जांच के लिए मामलों को फिर से खोल दिया गया है।”
उन्होंने बताया कि 1973 की दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173 (आठ) के तहत मामले फिर से खोले गए हैं, जो पुलिस को अंतिम रिपोर्ट जमा करने और अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद भी अपराध की जांच जारी रखने का अधिकार देता है।
कानपुर पुलिस ने स्थानीय समाचार चैनल से जुड़े अवनीश दीक्षित नाम के एक पत्रकार को सिविल लाइंस इलाके में करीब एक हजार करोड़ रुपये कीमत की सरकारी जमीन हड़पने के आरोप में 27 जुलाई की रात को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार पत्रकार और 13 अन्य लोगों के खिलाफ राजस्व लेखपाल और जमीन के कथित मालिक सैमुअल गुरुदेव सिंह ने कोतवाली पुलिस में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है।
गिरफ्तार पत्रकार व आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61 (2) आपराधिक साजिश, 74 (महिला की शील भंग करने के इरादे से उस पर आपराधिक बल का प्रयोग), 127 (2) (गलत तरीके से बंधक बनाना), 191 (2) दंगा, 308 (5) जबरन वसूली, 310 (2) डकैती, 324 (4) शरारत से नुकसान, 329 (4) घर में जबरन घुसना, 351 (2) आपराधिक धमकी, 352 जानबूझकर अपमान करना और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3/5 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जिलाधिकारी (डीएम) राकेश कुमार सिंह ने सोमवार को बताया था कि उन्हें सूचना मिली है कि आरोपियों ने सिविल लाइंस इलाके में करीब 7500 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है, जिसकी कीमत 1000 करोड़ रुपये से अधिक है।
सिंह ने बताया कि उन्होंने शहर के अपर जिलाधिकारी के नेतृत्व में राजस्व टीम भेजी, जिसने पाया कि जमीन सरकारी जमीन (नजूल) है और उसका पट्टा पहले ही समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि जमीन पट्टे पर दी गई थी, जिसे 25 साल के लिए नवीनीकृत भी किया गया था। यह पट्टा अब समाप्त हो चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में कानपुर के विभिन्न पुलिस थानों में दीक्षित के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
उन्होंने बताया कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
भाषा सं आनन्द