नागरिक समाज समूहों ने गुजरात विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों पर हमले की निंदा की
प्रीति मनीषा
- 18 Mar 2024, 06:05 PM
- Updated: 06:05 PM
अहमदाबाद, 18 मार्च (भाषा) नागरिक समाज समूहों ने सोमवार को गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रावास में नमाज पढ़ने को लेकर विदेशी छात्रों पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपराधियों और हमले को रोकने में कथित रूप से विफल होने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गुजरात स्थित व्यवसायी और हैदराबाद के मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति जफर सरेशवाला ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
सरेशवाला ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर किए गए एक ट्वीट में कहा, गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रावास के अंदर रमज़ान तरावीह पढ़ते समय विदेशी छात्रों की पिटाई और दुर्व्यवहार! मैंने गुजरात सरकार के सर्वोच्च अधिकारियों से बात की है। उन्होंने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।''
उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक व्यक्ति ने पूछा कि कुछ लोग बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ क्यों पढ़ते हैं। इसके जवाब में सरेशवाला ने कहा कि छात्रों ने अधिकारियों से अनुमति ली थी और रमज़ान करीम में यह तरावीह वर्षों से चल रही है।
वहीं, एक्स का उपयोग करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने उनसे परिसर का दौरा करने का अनुरोध किया तो सरेशवाला ने कहा कि पुलिस आयुक्त जीएस मलिक पहले ही वहां का दौरा कर चुके हैं और छात्रों को आश्वासन दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कर ली है।
नागरिक अधिकारों के एनजीओ ‘पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज’ (पीयूसीएल) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर हमला बेहद चिंताजनक है। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पीयूसीएल की राज्य ईकाई ने पुलिस आयुक्त मलिक और गुजरात के पुलिस महानिदेशक विकास सहाय को पत्र लिखा। जिसमें उन्होंने कहा कि विदेशी छात्रों पर किया गया यह हमला धार्मिक असहिष्णुता का परिणाम था जो संविधान के धर्मनिरपेक्ष लोकाचार और 'अतिथि देवो भव' (अतिथि भगवान के समान) में विश्वास रखने वाली भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि सभी अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। घटना के वीडियो से पता चलता है कि जब हमलावर छात्रों पर हमला करने के बाद जा रहे थे तो पुलिस मौके पर मौजूद थी। ऐसे में उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जानी चाहिए जो वहां मौजूद होने के बावजूद समय पर कार्रवाई करने में विफल रहे।
एनजीओ ने उन छात्रों को मुआवजा देने की भी मांग की जिनका सामान हमले में नष्ट हो गया।
‘सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया’ (कम्युनिस्ट) की राज्य आयोजन समिति ने भी घटना की निंदा की और उपद्रवियों के साथ-साथ उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जो वहां मौजूद थे लेकिन छात्रों पर हुए हमले को नहीं रोक सके।
संगठन ने एक बयान में कहा, ''यह सिर्फ घटना नहीं थी बल्कि पहले से साजिश रच कर छात्रों पर हमला किया गया था। हम न केवल अपराधियों, बल्कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करते हैं। इस घटना ने दुनिया में भारत की छवि खराब की है।
पुलिस के मुताबिक, अहमदाबाद में स्थित गुजरात विश्वविद्यालय में शनिवार की रात नमाज पढ़ने को लेकर कुछ लोगों के एक समूह ने विभिन्न विदेशी छात्रों पर हमला किया था।
उन्होंने बताया कि ए-ब्लॉक छात्रावास में विदेशी छात्रों पर हुए हमले में दो छात्र घायल हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक छात्र श्रीलंका से है तो दूसरा ताजिकिस्तान से है।
इस घटना के बाद पुलिस ने 20-25 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें दंगा, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होना, चोट पहुंचाना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आदि शामिल है।
पुलिस ने कहा कि इस मामले में अबतक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है जबकि घटना में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
भाषा प्रीति