दिल्ली कोचिंग सेंटर मौत मामले की जांच उच्च न्यायालय ने सीबीआई को सौंपी
अमित नेत्रपाल
- 02 Aug 2024, 10:29 PM
- Updated: 10:29 PM
नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां राजेंद्र नगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन विद्यार्थियों की मौत के मामले की जांच शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी।
उच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए सौंपी कि जनता को जांच पर कोई संदेह न हो।’’
इसने बेसमेंट में पानी भरने से तीन विद्यार्थियों की मौत के मामले में एक वाहन चालक को गिरफ्तार करने को लेकर दिल्ली पुलिस की आलोचना करते हुए कहा, “गनीमत है कि आपने बेसमेंट में घुसने वाले बारिश के पानी का चालान नहीं काटा।”
अदालत ने कहा, ‘‘आपने कहा होता कि पानी की हिम्मत कैसे हुई कि वह बेसमेंट में घुस गया। जिस तरह से आपने एसयूवी चालक को वहां कार चलाने के लिए गिरफ्तार किया था, आप पानी पर भी जुर्माना लगा सकते थे।’’
वाहन चालक मनुज कथूरिया पर आरोप था कि वह 27 जुलाई को अपना वाहन लेकर जलमग्न सड़क से गुजरे थे जिससे पानी उन तीन मंजिला इमारत के गेट से टकराया और गेट टूट गया जहां कोचिंग सेंटर स्थित था। आरोप था कि इससे इमारत के बेसमेंट में पानी भर गया जिसमें डूबने से तीन विद्यार्थियों की मौत हो गई।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने आपराधिक मामले में सीबीआई द्वारा समयबद्ध तरीके से की जाने वाली जांच की निगरानी के लिए केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा।
अदालत ने कहा, ‘‘हमें बड़ी तस्वीर को देखने की जरूरत है, क्योंकि शहर में कहीं अधिक बुनियादी समस्या है और अब समय आ गया है कि दिल्ली के प्रशासनिक, वित्तीय और भौतिक बुनियादी ढांचे पर फिर से विचार किया जाए, जो पुराना हो चुका है और वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नहीं है।’’
इसने इस मुद्दे से निपटने और आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के लिए दिल्ली के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) उपाध्यक्ष, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) आयुक्त भी शामिल हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘घटना की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि जनता को जांच के संबंध में कोई संदेह न हो, यह अदालत मामले की जांच सीबीआई को सौंपती है।’’
पीठ ने छात्रों के डूबने की घटना को लेकर पुलिस और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को फटकार लगाते हुए कहा कि वह यह समझ पाने में असमर्थ है कि छात्र बाहर कैसे नहीं आ सके। अदालत ने साथ ही यह भी जानना चाहा कि क्या दरवाजे अवरुद्ध थे या सीढ़ियां संकरी थीं।
इसने कहा, ‘‘आपका क्या कहना है? बच्चे कैसे डूबे? आपने अभी जांच की है। अभी दो अगस्त है। वे बेसमेंट से बाहर क्यों नहीं आ पाए? बेसमेंट में तुरंत पानी नहीं भरता। बेसमेंट में पानी भरने में कम से कम दो-तीन मिनट लगते हैं, एक मिनट में नहीं भर सकता। वे बाहर क्यों नहीं आ पाए?’’
पीठ ने कहा कि प्रशासनिक तौर पर दिल्ली में कई प्राधिकारी हैं जो केवल जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं और इसके अलावा कुछ कर नहीं रहे हैं। इसने कहा कि आम धारणा यह है कि नगर निगम के अधिकारी अक्षम हैं।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा कि अगर प्रशासक मुफ्तखोरी की संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं, तो उन्हें नहीं पता कि ढांचे को कैसे बदला जाए। अदालत ने कहा, ‘‘जीएसटी में एक बदलाव और राजस्व बढ़ जाएगा। आपको लीक से हटकर सोचना होगा। अगर आपको दिल्ली जैसी जगह पर राजस्व नहीं मिलता है, तो आपको यह कहीं और नहीं मिलेगा।’’
इसने कहा कि दिल्ली में भौतिक बुनियादी ढांचा करीब 75 साल पुराना है और यह न केवल अपर्याप्त है, बल्कि इसका रखरखाव भी ठीक से नहीं किया जाता।
अदालत में मौजूद एमसीडी आयुक्त द्वारा यह बताए जाने पर कि इलाके में बरसाती नालों से पानी की निकासी ठीक ढंग से नहीं हो रही थी, पीठ ने सवाल किया कि अधिकारियों ने एमसीडी प्रमुख को इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया।
पीठ ने राजेंद्र नगर क्षेत्र में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण को हटाने का भी आदेश दिया, जिसमें बरसाती नालों और सीवेज नालों पर किया गया अतिक्रमण भी शामिल है।
अदालत ने कहा कि दिल्ली की आबादी बढ़ने के साथ ही शहर को एक मजबूत व्यवस्था की जरूरत है और विभिन्न सब्सिडी योजनाओं के कारण राष्ट्रीय राजधानी में पलायन भी बढ़ रहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘एमसीडी जैसी निकाय एजेंसियों की वित्तीय स्थिति, यदि अनिश्चित नहीं है, तो स्वस्थ भी नहीं है। यह अदालत यह निष्कर्ष निकालने में गलत नहीं होगी कि दिल्ली में निकाय एजेंसियों के पास प्रमुख बुनियादी ढांचे को पूरा करने के लिए कोई धन नहीं है।’’
सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि मामले की जांच अत्यधिक तनाव में की गई थी और वह दोष का पता लगाने के लिए हर पहलू की फॉरेंसिक जांच करने की पूरी कोशिश कर रही है।
इस पर, अदालत ने टिप्पणी की कि ‘‘हम सभी बहुत तनाव में हैं’’ लेकिन वर्तमान परिदृश्य में, ‘‘हम तनाव में नहीं आ सकते।’’
अदालत ने कहा, ‘‘जब हम तनाव में आते हैं, तो हम गलत कदम उठाते हैं। और इस मामले में, कुछ गलत कदम उठाए गए हैं। कृपया वैज्ञानिक तरीके से जांच करें। किसी भी तनाव में न आएं।’’
इसने सवाल किया कि एक राहगीर को कैसे गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि उस अधिकारी को नहीं, जिसने यह नहीं देखा कि बरसाती नाले से ठीक तरह से जल निकासी नहीं हो रही है।
अदालत ने पुलिस को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उसने एमसीडी के किसी अधिकारी से पूछताछ नहीं की और न ही नगर निकाय से फाइल जब्त की, जो एक महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती थी।
इसने न्यायिक आदेशों का पालन न करने के लिए एमसीडी की खिंचाई की और कहा कि उसके अधिकारियों को परवाह नहीं है तथा कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं है।
अदालत ने सवाल किया कि क्या अधिकारियों के लिए मानव जीवन मायने नहीं रखता। इसने कहा कि कुछ जवाबदेही होनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि दिल्ली एक संकट से दूसरे संकट में जा रही है। इसने कहा कि एक दिन सूखे की समस्या है, दूसरे दिन बाढ़ आ जाती है। अदालत ने कहा कि यदि मानसून के दौरान पानी का ठीक से संग्रह किया जाए तो अगले वर्ष सूखा नहीं पड़ेगा।
इसने एमसीडी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि क्षेत्र में नालियों से पानी ठीक तरह से बहे और यदि उनकी क्षमता बढ़ानी है तो इसे जल्द से जल्द व्यवस्थित तरीके से किया जाए।
दिल्ली अग्निशमन सेवा द्वारा राऊ आईएएस स्टडी सर्किल को मंजूरी दिए जाने को लेकर, जहां डूबने की घटना हुई थी, यह संकेत देते हुए कि बेसमेंट का उपयोग भंडारण के लिए किया जा रहा था, अदालत ने पूछा कि कैसे कुछ ही दिनों में उस स्थान को अध्ययन कक्ष में बदल दिया गया।
अदालत कुटुंब नामक संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 27 जुलाई की शाम ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन अभ्यर्थियों की मौत की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का अनुरोध किया गया था।
जान गंवाने वाले तीन व्यक्तियों में उत्तर प्रदेश की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल के नेविन डेल्विन (24) शामिल थे।
इस बीच, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने राजेंद्र नगर में स्थित कोचिंग सेंटर में हुई मौतों के विरोध में अपना प्रदर्शन शुक्रवार को छठे दिन भी जारी रखा। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर कई छात्र पढ़ाई करते देखे गए।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे गौतम ने कहा, ‘‘हम अपना विरोध जारी रखेंगे, लेकिन हमारे लिए पढ़ाई भी महत्वपूर्ण है। इसलिए विरोध स्थल पर बैठे लोग अपनी अध्ययन सामग्री लेकर आए हैं।’’
इस बीच, कम से कम चार यूपीएससी कोचिंग संस्थानों- वाजीराम एंड रवि इंस्टिट्यूट, दृष्टि आईएएस, नेक्स्ट आईएएस और श्रीराम आईएएस ने बेसमेंट घटना में जान गंवाने वाले तीन विद्यार्थियों- श्रेया यादव, तान्या सोनी और नेविन डेल्विन के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की पेशकश की। इन तीनों छात्रों की 27 जुलाई को ओल्ड राजेंद्र नगर में राऊ आईएएस स्टडी सर्किल के बेसमेंट में बारिश का पानी भर जाने से मौत हो गई थी।
दृष्टि आईएएस और श्रीराम आईएएस ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी नीलेश राय के परिवार को भी 10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की पेशकश की, जिसकी 22 जुलाई को पटेल नगर में बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी।
तीन छात्रों की मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सहायता राशि को एक दिखावा और मुद्दे को कमजोर करने की एक रणनीति बताया।
वाजीराम एंड रवि इंस्टिट्यूट ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा, ‘‘राव आईएएस स्टडी सर्किल में वर्तमान में पंजीकृत उन छात्रों को मुफ्त में प्रवेश देने के लिए स्वेच्छा से काम कर रहे हैं’’ जो मुख्य परीक्षा 2024 और प्रारंभिक-सह-मुख्य परीक्षा 2025 की तैयारी कर रहे हैं। दिवंगत छात्रों के परिवारों के साथ एकजुटता के संकेत के रूप में, वाजीराम एंड रवि तीनों छात्रों में से प्रत्येक के परिवार को 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देगा।’’
श्रीराम आईएएस ने राव आईएएस स्टडी सर्किल के छात्रों को ‘‘जब भी जरूरत हो, उसकी कक्षाओं और पुस्तकालयों का उपयोग करने की पेशकश की।’’ नेक्स्ट आईएएस कोचिंग संस्थान ने मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की पेशकश की।
दृष्टि आईएएस ने कहा कि वह राव आईएएस स्टडी सर्किल के विद्यार्थियों को सामान्य अध्ययन, टेस्ट सीरीज और वैकल्पिक विषयों की तैयारी के लिए नि:शुल्क कक्षाएं उपलब्ध कराएगा।
राऊ आईएएस स्टडी सर्किल के संकाय सदस्यों ने कहा कि वे पांच अगस्त से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करेंगे।
भाषा अमित