बिहार विस : मानसून सत्र के अंतिम दिन आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष का सदन से बहिर्गमन
धीरज
- 26 Jul 2024, 07:51 PM
- Updated: 07:51 PM
(तस्वीर के साथ)
पटना, 26 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा में शुक्रवार को राज्य के संशोधित आरक्षण कानूनों को लेकर पेश एक निजी विधेयक पर मतदान कराने की मांग अस्वीकार किए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को निजी विधेयक के जरिये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) के विधायक अजीत कुमार सिंह ने आरक्षण में संशोधन को लेकर पारित दो कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाले की मांग की। इन दोंनों संशोधित कानूनों में वंचित वर्गों के लिए कोटा बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया था।
बिहार विधानसभा परिसर में बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) विधायक भाई वीरेंद्र ने निजी विधेयक पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट होने की स्थिति में मतदान का प्रावधान होने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि मत विभाजन की विपक्ष की मांग को अध्यक्ष ने सरकार के इशारे पर खारिज कर दिया।
राजद विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा),‘‘दलितों के आरक्षण का विरोध करती रही है’’। विधानसभा के मौजूदा अध्यक्ष नंद किशोर यादव भाजपा से आते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बने रहने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनकी ‘‘गोदी में बैठकर किलकारी भर रहे हैं’’।
नीतीश कुमार के नेतृत्व वाल पिछली ‘महागठबंधन’ सरकार ने जाति आधारित गणना कराया था जिसके मुताबिक राज्य में पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासियों की कुल आबादी में हिस्सेदारी करीब दो तिहाई है। इसके बाद तत्कालीन ‘महागठबंधन’ सरकार ने इन वर्गों का आरक्षण बढ़ाने के लिए विधेयक पारित किया था।
इन आरक्षण कानूनों को नौवीं अनुसूची में रखे जाने से ये न्यायिक समीक्षा से मुक्त हो जाएंगे और राज्य सरकार की ओर से इसके लिए अनुरोध केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के समक्ष लंबित है।
इस बीच, पटना उच्च न्यायालय द्वारा आरक्षण में की बढ़ोतरी को खारिज कर दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को दिन भर की कार्यवाही समाप्त होने पर दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया।
बिहार विधानसभा का सत्र स्थगित किए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘‘विपक्ष उस व्यक्ति की तरह व्यवहार कर रहा है जो स्टेशन पर देर से पहुंचता है और ट्रेन छूटने के बाद ट्रेन के पीछे भागता है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘वे हताश हैं कि जाति सर्वेक्षण और आरक्षण में बढ़ोतरी का श्रेय मुख्यमंत्री को मिल रहा है। वे कुछ सुर्खियां बटोरना चाहते थे। जब केंद्र से इन्हें नौवीं अनुसूची में डाले जाने के लिए पहले ही अनुरोध किया जा चुका है, तो इस मुद्दे को फिर से उठाना बेतुका है।’’
चौधरी ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद संशोधित आरक्षण कानून प्रभावी नहीं रह गए हैं। पुराने कानून जिसके तहत आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की गयी है, लागू रहेंगे। यह एक तकनीकी बात है जिसे विपक्ष को समझना चाहिए।
बिहार विधानमंडल के पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान कुल मिलाकर सात विधेयक पारित किए गए जिनमें से दो का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्रों के लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकना है।
भाषा अनवर