छत्तीसगढ़ : विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरी में विस्फोट के मुद्दे पर कांग्रेस ने सदन से किया बहिर्गमन
संजीव धीरज
- 26 Jul 2024, 06:22 PM
- Updated: 06:22 PM
रायपुर, 26 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में विस्फोटक बनाने वाली फैक्टरी में इस साल मई माह में हुए भीषण विस्फोट की घटना में राज्य सरकार की कार्रवाई से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने शुक्रवार को विधानसभा से बहिर्गमन किया।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह और शेषराज हरबंस ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया और कहा कि इस साल 25 मई को राज्य के बेमेतरा जिले के पिरदा गांव में स्पेशल ब्लास्ट्स लिमिटेड में भीषण विस्फोट हुआ था। उन्होंने कहा कि विस्फोट में कई कर्मचारियों की इस तरह मौत हो गई कि उनके शरीर के अंग भी नहीं मिल पाए।
दोनों विधायकों ने कहा कि इस घटना में कई लोग घायल भी हुए हैं।
विधायकों ने कहा कि फैक्टरी प्रबंधन मौतों की वास्तविक संख्या छिपा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस घटना में राज्य के बाहर से आए कई श्रमिकों के मारे जाने की खबर है लेकिन प्रबंधन इस तथ्य को छिपा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि यह दुर्घटना घोर आपराधिक लापरवाही और विस्फोटक पदार्थों के निर्माण और भंडारण के नियमों का पालन न करने के कारण हुई है।
विधायकों ने कहा कि फैक्टरी में निर्मित और भंडार किए गए विस्फोटक अनुमति की मात्रा से कहीं अधिक थे।
उन्होंने दावा किया कि फैक्टरी के मालिक या प्रबंधक के खिलाफ कोई सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से लोगों में काफी आक्रोश है।
अपने जवाब में राज्य के वाणिज्य और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि विस्फोट की घटना विस्फोटक निर्माण भवन में विस्फोटकों को उठाने और भंडारण के दौरान हुई।
उन्होंने कहा कि इमारत पूरी तरह से नष्ट हो गई और फैक्टरी परिसर के अंदर स्थित अन्य विनिर्माण संयंत्र भी क्षतिग्रस्त हो गए।
मंत्री ने कहा, ‘‘दुर्घटना में नौ श्रमिकों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। यह कहना सही नहीं है कि फैक्टरी प्रबंधन द्वारा मृतकों की संख्या छिपाई जा रही है।’’
उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर मिले श्रमिकों के शवों के अवशेषों की पहचान के लिए जिला प्रशासन द्वारा डीएनए परीक्षण कराया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि विस्फोटक कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक साल में यहां नवा रायपुर में उप विस्फोटक नियंत्रक, पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन, भारत सरकार द्वारा आठ बार कारखाने का निरीक्षण किया गया और इकाई को वहां पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने बताया कि विस्फोट की घटना के बाद, पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन, भारत सरकार ने अपनी जांच के आधार पर स्पेशल ब्लास्ट लिमिटेड को जारी सभी लाइसेंस रद्द कर दिए हैं।
मंत्री ने बताया कि दुर्घटना की जांच राज्य के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उप निदेशक और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दुर्ग जिले के सहायक निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
मंत्री ने आगे कहा, “यह कहना गलत है कि प्रबंधक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जांच के बाद उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, दुर्ग ने कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत 26 मई को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर कारखाना परिसर में विनिर्माण से संबंधित सभी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है, जो वर्तमान में प्रभावी है।’’
उन्होंने बताया, ‘‘ फैक्टरी के अधिभोगी अवधेश जैन और फैक्टरी प्रबंधक सतीश कुमार के खिलाफ कारखाना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए 10 जून को श्रम न्यायालय, दुर्ग में आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया है। मामला न्यायालय में लंबित है।’’
उन्होंने बताया कि घटना के संबंध में जैन और अन्य के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड विधान की धाराओं और विस्फोटक अधिनियम, 1984 के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की है।
उन्होंने कहा कि इसलिए यह कहना सही नहीं है कि राज्य सरकार ने पीड़ितों के परिजनों को आर्थिक सहायता देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है।
इसके बाद कांग्रेस सदस्य राघवेंद्र सिंह ने पूछा कि फैक्टरी के संचालक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
इस मुद्दे पर विधायकों और विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने कहा कि विपक्ष सरकार के जवाब से असंतुष्ट है। बाद में विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।
भाषा संजीव