लोकसभा में निजी संकल्प के जरिए विमान किरायों के विनियमन के लिए समिति के गठन की मांग
सुरेश वैभव
- 26 Jul 2024, 06:14 PM
- Updated: 06:14 PM
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) सरकार से विमान किरायों के विनियमन के लिए एक समिति या निकाय के गठन की मांग लोकसभा में शुक्रवार को एक निजी संकल्प के जरिये की गयी।
कांग्रेस के सांसद शफी परम्बिल ने गैर-सरकारी सदस्यों के कामकाज के तहत निजी संकल्प के जरिये यह मांग की। उन्होंने कहा कि विमान किरायों के नियमन नहीं होने के कारण प्रवासी मजदूरों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और वे महीनों और सालों स्वदेश नहीं लौट पाते हैं।
उन्होंने एअर इंडिया के आज के कोच्चि और दुबई के बीच यात्रा के लिए टिकट की कीमत (19,000 रुपये) का उदाहरण देते हुए कहा कि आज चार सीट खाली हैं तो इसकी कीमत 19,000 रुपये बताई जा रही है, जबकि एक महीने बाद 31 अगस्त के टिकट की कीमत 77,573 रुपये है, जबकि नौ सीट खाली हैं।
उन्होंने कहा कि इस उदाहरण से यह पता चलता है कि टिकटों की कीमत मांग और आपूर्ति के अनुपात से प्रभावित नहीं हो रही है और इसे ही विनियमित किये जाने की आवश्यकता है।
परम्बिल ने कहा कि अपना जीवनयापन करने विभिन्न देशों में गये प्रवासी मजदूर कभी कभार तो अपने माता-पिता और परिजनों के अंतिम संस्कार तक में नहीं पहुंच पाते हैं क्योंकि उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वह महंगे टिकट खरीदकर स्वदेश लौट सकें, जबकि इन प्रवासी भारतीयों का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान हजारों करोड़ रुपये का होता है।
इस पर अध्यक्ष ओम बिरला ने नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू से कहा, ‘‘मंत्री जी, आप सभी विमानन कंपनियों को बुलाकर बात कीजिए और इस समस्या का हल निकालिए।’’
कांग्रेस सदस्य ने टिकटों की कीमत पर नियंत्रण के लिए एक बोर्ड या निकाय के गठन की मांग की ताकि विमानन कंपनियों पर अंकुश लगाया जा सके।
उन्होंने दूसरे देशों में समान दूरी और समान समय की यात्रा सेवाओं पर तुलनात्मक तरीके से कम किराया लगने का उदाहरण देते हुए पूछा कि सरकार इस लूट को रोकने के लिए कदम क्यों नहीं उठाती?
चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद दुष्यंत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम आदमी और समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति को एक अवसर दिया है कि वह विमान यात्रा कर सके। उनका इशारा राजग सरकार की ‘उड़ान’ योजना की ओर था।
सिंह ने कहा कि किरायों का नियमन पहले होता था लेकिन 1994 में संबंधित कानून को निरस्त किया गया और किराये को विनियमित करने की आजादी दी गयी।
उन्होंने सलाह दी कि विभिन्न दूतावासों में एक संस्था या निकाय स्थापित किया जाना चाहिए ताकि प्रवासी भारतीय को दिक्कत की स्थिति में आर्थिक सहायता मिल सके।
दुष्यंत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विमानन क्षेत्र में एक क्रांति आ रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को विमानों के हवाई किराये को विमानन उद्योग को देखते हुए नियंत्रित करना चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि (विमानन) उद्योग समाप्त हो जाए। हम चाहते हैं कि उद्योग भी चले, लोग भी विमान यात्रा करें।’’
आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह केरल के लिहाज से संवेदनशील मुद्दा है जहां से 30 लाख से अधिक लोग पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं और इनमें 90 प्रतिशत से अधिक निचले और मध्य वर्ग के हैं।
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या उसने एअर इंडिया के निजीकरण के बाद इसकी सेवाओं में कोई सुधार देखा है और क्या इस संबंध में कोई अध्ययन किया है।
प्रेमचंद्रन ने दावा किया कि उनका अनुभव है कि एअर इंडिया की हालत जस की तस है और उसकी सेवाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है।
उन्होंने कुछ सैकंड के अंतर पर उड़ानों का किराया बेतहाशा बढ़ने की ओर ध्यान दिलाते हुए नागर विमानन मंत्री से इस ओर ध्यान देने की बात कही।
भाषा सुरेश