एमपीलैड राशि बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करने की राज्यसभा में हुई मांग
अविनाश सुरेश
- 24 Jul 2024, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस के एक सदस्य ने संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) की राशि बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये करने की मांग की और कहा कि पिछले 13 साल से इस राशि में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने विशेष उल्लेख के जरिये यह मांग की और कहा कि इस योजना की शुरुआत 1993 में तत्कालीन पीवी नरसिंह राव सरकार ने की थी और शुरुआत में यह राशि प्रत्येक सांसद के लिए पांच लाख रुपये थी।
उन्होंने कहा कि 2011-12 में इस राशि को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया गया था और उसके बाद से इसमें वृद्धि को लेकर कोई विचार नहीं किया गया है।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि कई राज्यों में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत निर्धारित राशि प्रति विधायक पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक है और दिल्ली में तो प्रत्येक विधायक को इस योजना के तहत 10 करोड़ रुपये मिलते हैं।
विशेष उल्लेख के जरिये ही आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा ने महाराजा रणजीत सिंह के सिंहासन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अपनी वीरता और न्यायप्रियता के लिए मशहूर महाराजा रणजीत सिंह का सोने का सिंहासन लंदन के एक संग्रहालय में रखा हुआ है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि उसे कूटनीति का इस्तेमाल कर महाराजा रणजीत सिंह का सिंहासन वापस लाने का प्रयास करना चाहिए।
उनकी ही पार्टी के संजय सिंह ने बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और उन्हें अकेले रहने के लिए मजबूर होने का मुद्दा उठाया। सिंह ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि करीब 23 प्रतिशत बुजुर्ग अकेले रहने के लिए मजबूर हैं।
सिंह ने मांग की कि बुजुर्गों को उनकी परेशानी से बचाने के लिए एक कानून बनाया जाए।
‘आप’ के ही अशोक मित्तल ने आवारा पशुओं के हमलों में लोगों के हताहत होने का मुद्दा उठाया।
भाजपा के नागेंद्र राय ने कूचबिहार को अलग केंद्रशासित क्षेत्र बनाए जाने की मांग की, वहीं तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को देश के विभिन्न हिस्सों में प्रभावी तरीके से लागू किए जाने की मांग की।
भाजपा के बृज लाल ने उत्तर प्रदेश के बागपत से गुजरने वाली नदियों के प्रदूषित होने का मुद्दा उठाया और कहा कि इन नदियों में कई घातक तत्व होते हैं, जिनसे आसपास रहने वाले लोग कैंसर सहित कई घातक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या दो दशक से बरकरार है। उन्होंने इस समस्या के हल के लिए युद्धस्तर पर काम करने की मांग की।
वाईएसआर कांग्रेस के अयोध्या रामी रेड्डी ने जहां औद्योगिक हादसों के मद्देनजर एक कानून बनाए जाने की मांग की, वहीं भाजपा के अनिल बोंडे ने बांग्लादेश में नारंगी के आयात शुल्क में भारी वृद्धि किए जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि इससे महाराष्ट्र के किसान प्रभावित हो रहे हैं।
भाजपा के भीम सिंह ने पटना एम्स में सुविधाएं बढ़ाने की मांग की जबकि आईयूएमएल के हारिस बीरन ने केरल में निपाह बीमारी का मुद्दा उठाया।
भाजपा के दीपक प्रकाश ने रांची और पटना के बीच ट्रेन सेवा से जुड़ा मुद्दा उठाया, जबकि बीजद के सस्मित पात्रा ने ओडिशा में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की।
माकपा सदस्य वी शिवदासन ने कृषि मजदूरों से जुड़ा मुद्दा उठाया और उन्हें एक निश्चित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा दिए जाने की मांग की।
बीजू जनता दल (बीजद) के सुजीत कुमार, सुलता देव, मुजीबुल्ला खान और निरंजन बिशी, भाजपा के भागवत कराड, सुमित्रा बाल्मीक, दोरजी टी लेप्चा, मेधा विश्राम कुलकर्णी, संजय सेठ, शंभुशरण पटेल, सिकंदर कुमार और नरेश बंसल, राजद के मनोज झा, द्रमुक की एनवीएन सोमू कनिमोझी और पी विल्सन, भाकपा सदस्य पी पी सुनीर, माकपा के वी शिवदासन, आईयूएमएल के अब्दुल वहाब ने भी विशेष उल्लेख के जरिये लोक महत्व के विभिन्न मुद्दे उठाए।
भाषा अविनाश