पूजा खेडकर मामले में दिव्यांगों के प्रति ‘पूर्वाग्रह वाली’ टिप्पणी पर अफसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग
अमित पवनेश
- 24 Jul 2024, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) गैर सरकारी संगठन 'डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज' ने दिव्यांगों के प्रति सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भेदभावपूर्ण या पूर्वाग्रह वाली टिप्पणी करने के लिए तेलंगाना कैडर की नौकरशाह स्मिता सभरवाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
'डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज' ने कहा है कि ऐसी टिप्पणी सामाजिक न्याय और दिव्यांगता अधिकारों के सिद्धांतों को कमजोर करती है।
यह विवाद सभरवाल की कई पोस्ट से उत्पन्न हुआ है, जिनमें उन्होंने अखिल भारतीय सेवाओं (एआईएस) में दिव्यांगों के लिए कोटा की आवश्यकता पर सवाल उठाया था और सवाल किया था कि भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) और रक्षा बलों जैसे कुछ क्षेत्रों में ऐसा आरक्षण क्यों लागू नहीं किया गया है।
उन्होंने सरकारी अधिकारियों की तुलना पायलट और सर्जन से की तथा सवाल किया कि क्या एयरलाइन कंपनियां किसी दिव्यांग व्यक्ति को नौकरी पर रखेंगी या फिर क्या कोई व्यक्ति किसी दिव्यांग सर्जन पर भरोसा करेगा।
सभरवाल ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘चूंकि यह बहस जोर पकड़ रही है - दिव्यांगों के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए, क्या एयरलाइन किसी दिव्यांग पायलट को नौकरी पर रखती है? या आप किसी दिव्यांग सर्जन पर भरोसा करेंगे? एआईएस (आईएएस/आईपीएम/आईएफओएस) की प्रकृति क्षेत्र में कार्य, लंबे समय तक काम, लोगों की शिकायतों को सीधे सुनना है, जिसके लिए शारीरिक फिटनेस की आवश्यकता होती है।‘‘
उन्होंने पोस्ट में कहा, "इस प्रमुख सेवा को इस आरक्षण की आवश्यकता क्यों है?’’
'डॉक्टर्स विद डिसेबिलिटीज' समूह के सदस्य डॉ. सतेंद्र सिंह ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि सभरवाल की टिप्पणी "दिव्यांगों के प्रति कथित तौर पर भेदभावपूर्ण या पूर्वाग्रह’’ को प्रतिबिंबित करती है, जो सरकार द्वारा प्रचारित समावेशी लोकाचार के विपरीत है।
पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968, सेवा के सदस्यों को किसी भी सरकारी नीति की प्रतिकूल आलोचना करने वाले बयान देने से स्पष्ट रूप से रोकता है।
डॉ. सिंह ने कहा, "सुश्री सभरवाल की टिप्पणी दिव्यांग व्यक्तियों के कोटा पर सरकारी नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना करके इन आचरण नियमों का उल्लंघन करती है।"
उन्होंने कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) और दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडी) से सभरवाल के खिलाफ तत्काल और उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
यह बहस परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ कदाचार के आरोपों के मद्देनजर शुरू हुई है। पूजा पर सिविल सेवा में चयन के लिए फर्जी दिव्यांगता और ओबीसी प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने शुक्रवार को परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई शुरू की, जिनमें फर्जी पहचान के जरिए सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के आरोप में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराना शामिल है।
भाषा अमित