आरएसएस-भाजपा ने सरकारी कर्मियों को संघ की गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति देने के फैसले को सराहा
संतोष दिलीप
- 22 Jul 2024, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सरकारी कर्मचारियों के हिंदूवादी संगठन की गतिविधियों में भाग लेने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के केंद्र के कदम की सोमवार को सराहना की। संघ ने कहा कि इस फैसले से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी।
संघ ने आरोप लगाया कि अतीत में पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रतिबंध लगाकर अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का काम किया।
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 1966 में सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाने का कांग्रेस सरकार का फैसला राजनीतिक कारणों से प्रेरित था।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस की राष्ट्रवादी संगठनों के प्रति हमेशा नकारात्मक मानसिकता रही है और ऐसी सोच का देश में कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंध हटाने के मोदी सरकार के फैसले की आलोचना करने वाले विपक्षी दल केवल तुष्टिकरण की राजनीति में रुचि रखते हैं और उन्होंने हिंदुओं के प्रति नकारात्मक रवैया प्रदर्शित किया है।
गोयल ने आरएसएस को एक राष्ट्रवादी संगठन बताया, जिसके सदस्य देशभक्ति से भरे हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने फैसले की सराहना करते हुए कहा कि आरएसएस ने हमेशा सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय अखंडता के लिए काम किया है और इसके स्वयंसेवकों ने प्राकृतिक आपदाओं और ऐसी अन्य त्रासदी के समय प्रभावित लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया है।
प्रतिबंध हटाए जाने के सरकारी आदेश के सार्वजनिक होने और कई विपक्षी नेताओं द्वारा इस कदम की आलोचना किए जाने के एक दिन बाद आरएसएस के प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने एक बयान में कहा, ‘‘सरकार का मौजूदा निर्णय उचित है और यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 99 वर्षों से लगातार राष्ट्र के पुनर्निर्माण और समाज की सेवा में लगा हुआ है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता-अखंडता और प्राकृतिक आपदा के समय में समाज को साथ लेकर चलने में संघ के योगदान के कारण देश के विभिन्न स्तर के नेतृत्व ने समय-समय पर संघ की भूमिका को सराहा है।”
आंबेकर ने आरोप लगाया, “राजनीतिक हितों के कारण तत्कालीन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के संघ जैसे रचनात्मक संगठन की गतिविधियों में हिस्सा लेने पर बेबुनियाद प्रतिबंध लगा दिया था।”
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिबंध हटाने को ‘शर्मनाक’ बताया।
उन्होंने कहा कि इस आदेश से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर (आईटी) विभाग, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी आधिकारिक तौर पर अपनी संघी पहचान प्रदर्शित कर सकते हैं।
प्रियंका ने कहा, ‘‘यह बहुत शर्म की बात है। केवल भारत माता के हितों के साथ जुड़ने के बजाय भाजपा उन्हें वैचारिक हितों को पहले रखने की ओर ले जा रही है।’’
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस भारत की बहुलता में विश्वास नहीं करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस के सदस्य हिंदू राष्ट्रवाद की कसम खाते हैं। इसलिए यह भारतीय राष्ट्रवाद के खिलाफ हैं।’’
जमात-ए-इस्लामी हिंद के पदाधिकारियों ने कहा कि वे आधिकारिक आदेश में किए गए बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही अपनी प्रतिक्रिया तैयार करेंगे।
भाषा
संतोष