तीन साल में सरकार ने संसद में 913 आश्वासन दिए जिनमें 583 का कार्यान्वयन किया गया : मुरुगन
अविनाश मनीषा
- 22 Jul 2024, 05:16 PM
- Updated: 05:16 PM
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने सोमवार को राज्यसभा को सूचित किया कि पिछले तीन साल में सरकार ने संसद में 913 आश्वासन दिए जिनमें से 583 का कार्यान्वयन किया जा चुका है और 330 लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि नीतिगत मुद्दे एवं संशोधनों सहित विभिन्न कारणों से आश्वासनों के कार्यान्वयन में देरी होती है।
मुरुगन राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न पूरक सवालों का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन साल में 913 आश्वासन दिए गए। पिछले तीन साल में 583 का कार्यान्वयन किया गया। 330 अभी लंबित हैं।’’
उन्होंने कहा कि आश्वासनों को, आश्वासन दिए जाने की तारीख से तीन महीने की अवधि के अंदर पूरा किया जाना आवश्यक है, लेकिन उनमें से कुछ का समय पर कार्यान्वयन नहीं हो सका है और आश्वासन समिति से समय की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि 1956 से 2024 तक संसद में सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों के कार्यान्वयन की दर 99 प्रतिशत से अधिक रही है।
मुरुगन ने कहा कि इस अवधि के दौरान राज्यसभा में दिए गए आश्वासनों के कार्यान्वयन की दर 99.07 प्रतिशत रही जबकि लोकसभा में यह दर 99.43 प्रतिशत रही।
इसी दौरान कांग्रेस सदस्य शक्तिसिंह गोहिल ने आरोप लगाया कि संसद सदस्यों द्वारा मंत्रियों को लिखे गए पत्रों का जवाब नहीं मिलता है।
इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि शिष्टाचार और सद्भावना के तहत सरकारी विभागों और मंत्रियों को पत्रों का जवाब देना चाहिए लेकिन ऐसा कोई बाध्यकारी नियम नहीं है जिसके तहत किसी खास पत्र का जवाब देना जरूरी हो।
वाईएसआर कांग्रेस सदस्य रायगा कृष्णैया के सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्रालय ने बताया कि उसने ऑनलाइन आश्वासन निगरानी प्रणाली (ओएएमएस) नामक एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है तथा सभी मंत्रालयों को आईडी और पासवर्ड प्रदान किये गए हैं।
उसने कहा कि मंत्रालय इस पोर्टल पर कार्यान्वयन रिपोर्ट अपलोड कर सकते हैं और आश्वासनों को छोड़ने का अनुरोध कर सकते हैं तथा आश्वासनों की पूर्ति हेतु समय बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय समय-समय पर, सभी मंत्रालयों/विभागों को लंबित आश्वासनों को शीघ्र पूरा करने के संबंध में स्मरण कराता रहता है।
भाषा अविनाश