राजभवन समिति की रिपोर्ट में बंगाल के राज्यपाल के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया गया
अमित आशीष
- 21 Jul 2024, 12:01 AM
- Updated: 12:01 AM
कोलकाता, 20 जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस के खिलाफ एक पूर्व महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोपों को राजभवन समिति की आंतरिक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में खारिज कर दिया गया है।
शनिवार को सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शिकायतें "गलत मंशा से प्रेरित" थीं।
पूर्व जिला न्यायाधीश (पांडिचेरी न्यायिक सेवा) डी. रामबाथिरानी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 अप्रैल और 2 मई को राज्यपाल के खिलाफ कथित यौन दुराचार को "निराधार बताकर खारिज कर दिया गया।"
इस साल 3 मई से 7 मई के बीच राजभवन में कथित घटना की खबर देने वाले कई अखबारों की कतरनों पर विचार करने के अलावा, एक सदस्यीय जांच समिति ने अपने निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दो एडीसी और राज्यपाल के ओएसडी सहित राजभवन के आठ कर्मचारियों से गवाह के तौर पर पूछताछ की।
रिपोर्ट में कहा गया है, "2 मई, 2024 को प्रधानमंत्री के राजभवन दौरे के समय कथित घटना की सत्यता पर संदेह हैं और आरोपों के पीछे एक भयावह मकसद का संकेत मिलता है।"
इसमें कहा गया है कि कथित घटना होने से पहले ही स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) ने परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है, "इन परिस्थितियों को देखते हुए, यह बिल्कुल असंभव लगता है कि राज्यपाल शिकायतकर्ता के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए ऐसा क्षण चुनेंगे।"
रिपोर्ट में आरोपों को "दुर्भावनापूर्ण" करार दिया गया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि राजभवन में अन्य महिला कर्मचारियों ने गवाही दी है कि उन्हें राज्यपाल से किसी भी अनुचित व्यवहार का सामना नहीं करना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे 24 अप्रैल और 2 मई को राजभवन में राज्यपाल से छेड़छाड़ सहित यौन दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, 2 मई की बैठक के दौरान, जब राजभवन का एक पर्यवेक्षक मौजूद था, तो वह कमरे से बाहर जाने के बाद भी कक्ष में बैठी रही।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर करके एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें और तीन अन्य को बोस के खिलाफ कोई भी अपमानजनक या गलत बयान देने से रोका गया था।
राज्यपाल द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे में एकल पीठ ने मंगलवार को अंतरिम आदेश पारित किया था। बनर्जी की अपील में आदेश को चुनौती दी गई है, जो 14 अगस्त तक प्रभावी है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को "कचरा" बताया। उन्होंने राज्यपाल पर अपनी पसंद के न्यायाधीश के साथ जांच समिति बनाकर खुद को ‘क्लीन चिट’ देने का आरोप लगाया।
घोष ने सवाल किया, "अगर वह निर्दोष हैं, तो वह कोलकाता पुलिस की पूछताछ से क्यों बच रहे हैं? अगर उन्हें यकीन है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है, तो वह राज्यपाल के तौर पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत छूट क्यों मांग रहे हैं? उन्हें जांचकर्ताओं द्वारा पूछताछ का सामना करने दें।"
शनिवार देर शाम तृणमूल कांग्रेस सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए इसे "न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप" बताया।
भाषा अमित