सोनी के इस्तीफे और 'घोटाले' का क्या संबंध, एनटीए प्रमुख क्यों बचे हुए हैं: कांग्रेस
हक हक पवनेश
- 20 Jul 2024, 07:06 PM
- Updated: 07:06 PM
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अध्यक्ष मनोज सोनी के इस्तीफे के बाद शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को यूपीएससी से जुड़े विवाद पर स्पष्टीकरण देना चाहिए तथा सरकार को यह भी बताना चाहिए कि क्या इतने सारे घोटालों और इस्तीफ़े के बीच कोई संबंध है।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सोनी के इस्तीफे को एक महीने तक छिपाकर क्यों रखा गया ?
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के प्रमुख प्रदीप कुमार जोशी क्यों बचे हुए हैं?
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए सोनी को बाहर किया जाएगा।
यूपीएससी के अध्यक्ष मनोज सोनी ने ‘‘निजी कारणों’’ का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सोनी का कार्यकाल मई 2029 में समाप्त होना था।
खरगे ने ‘एक्स’ पर सरदार वल्लभभाई पटेल को उद्धृत करते हुए दावा किया, ‘‘भाजपा-आरएसएस व्यवस्थित रूप से भारत के संवैधानिक निकायों पर संस्थागत कब्ज़ा करने में लगी हुई हैं, जिससे इन संस्थाओं की प्रतिष्ठा, शुचिता और स्वायत्तता को नुकसान पहुंच रहा है।’’
उन्होंने कहा कि यूपीएससी को परेशान करने वाले कई घोटाले राष्ट्रीय चिंता का कारण हैं।
खरगे का कहना है, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी और उनके कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्री को सफाई देनी होगी। अयोग्य व्यक्तियों द्वारा फर्जी जाति और चिकित्सा प्रमाण पत्र बनाने के कई मामलों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने 'फुलप्रूफ' प्रणाली को धोखा दिया है।’’
उन्होंने दावा किया कि यह एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों सहित लाखों उम्मीदवारों की वास्तविक आकांक्षाओं का सीधा अपमान है, जो सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में कड़ी मेहनत करते हैं, आधी रात को पसीना बहाते हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘यह परेशान करने वाली बात है कि कैसे यूपीएससी अध्यक्ष ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्तीफा दे दिया।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘उनका इस्तीफा एक महीने तक गुप्त क्यों रखा गया? क्या इतने सारे घोटालों और इस्तीफ़े के बीच कोई संबंध है?’’
खरगे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री के पसंदीदा व्यक्ति को गुजरात से लाया गया और पदोन्नत करके यूपीएससी का अध्यक्ष बनाया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘इसकी उच्चतम स्तर पर गहन जांच की जानी चाहिए ताकि भविष्य में यूपीएससी में धोखाधड़ी के ऐसे मामले न हों।’’
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यूपीएससी देश की सबसे नामी परीक्षा है और उससे निकले लोग शासन व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ होते हैं। देश के करोड़ों लोगों का भरोसा और हमारे रोजमर्रा के शासन-प्रशासन का कामकाज इस संस्था की पेशेवर प्रणाली से जुड़ा है।’’
उनका कहना था, ‘‘मैंने खुद देखा है कि इस परीक्षा के लिए युवा कितनी मेहनत, आंखों में ढेर सारे सपने लिए करते हैं।’’
प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘यूपीएससी की प्रक्रियाओं में गड़बड़ी की खबरें बहुत हैरान करने वाली हैं। इस महत्वपूर्ण चयन प्रक्रिया में हुई एक भी गड़बड़ी बड़े सवाल खड़े करती है और लाखों युवाओं के सपनों और उनके विश्वास पर चोट करती है। जरूरी है कि इन सवालों का जवाब जनता और यूपीएससी की तैयारी करने वाले युवाओं को मिले।’’
उन्होंने सवाल किया कि क्या इसके लिए यूपीएससी के उच्च पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों से आए लोग जिम्मेदार हैं और यदि हां तो उन पर कार्रवाई कब होगी?
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा, ‘‘जिस व्यवस्था में एक-एक नंबर के चलते उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा होती है, उसमें क्या केवल सतही तौर पर जांच करके पल्ला झाड़ना उचित है? नकली प्रमाणपत्र का सिस्टम एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग व इडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को मिलने वाले मौके पर चोट करता है। क्या प्रमाणपत्र जांचने की कोई ठोस संस्थागत प्रणाली विकसित नहीं की जा सकती?’’
उन्होंने कहा कि प्रणाली को और अधिक पारदर्शी व प्रामाणिक बनाने के लिए बदलावों की सख्त जरूरत है, क्या इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा, ‘‘इससे जुड़े सवाल इस देश के शासन-प्रशासन के प्रति भरोसे और हमारे करोड़ों युवाओं के सपनों से जुड़े सवाल हैं। इस पर सरकार से जवाब आना जरूरी है।
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘नरेन्द्र मोदी 2017 में गुजरात से अपने पसंदीदा 'शिक्षाविदों' में से एक को यूपीएससी सदस्य के रूप में लाए और उन्हें 2023 में छह साल के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनाया। लेकिन इस तथाकथित प्रतिष्ठित सज्जन ने अब अपना कार्यकाल समाप्त होने से पांच साल पहले ही इस्ती़फा दे दिया है।’’
रमेश का कहना है, ‘‘कारण चाहे जो भी बताए जाएं, यह स्पष्ट रूप से लग रहा था कि यूपीएससी के मौजूदा विवाद को देखते हुए उन्हें बाहर किया जाएगा।’’
उन्होंने कहा कि ऐसे कई और व्यक्तियों ने व्यवस्था को दूषित किया है। रमेश ने कहा कि एनटीए के अध्यक्ष अब तक बचे क्यों हैं?"
सूत्रों ने कहा कि सोनी के इस्तीफे का परिवीक्षाधीन आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद ‘‘संघ लोक सेवा आयोग पर उठ रहे सवालों से कोई लेना-देना नहीं है।’’
भाषा हक हक